रामलीला स्वयंवर में श्रीराम ने तोड़ा शिव धनुष, जानकी से हुआ विवाह, वेरिवो मोटर्स के गर्ग बंधुओं ने परिवार सहित की श्रीराम-लक्ष्मण की आरती

ऐलनाबाद, 27 सितंबर ( एम पी भार्गव) शहर के श्री रामलीला मैदान में चल रही रामलीला कमेटी के बैनर तले वृंदावन से आये कलाकारों की भव्य श्रीरामलीला का मंचन चौथे दिन भी जारी रहा। मध्यरात्रि तक चली श्री रामलीला को देखने हज़ारों महिला पुरुष दर्शक पहुंचे। चौथे दिन की श्रीरामलीला के प्रारंभ में स्थानीय उद्योगपति व वेरिवो ई बाइक्स के डायरेक्टर संजय गर्ग, उनके अनुज भ्राता रवि गर्ग व उनके परिजनों तथा कमेटी के सदस्यों ने सामुहिक रूप से भगवान श्रीराम-लक्ष्मण की आरती की। श्रीरामलीला कमेटी के अध्यक्ष सज्जन गोयल व उनकी कार्यकारिणी के सभी सदस्यों ने उनका माला व श्रीरामनाम का पटका पहनाकर स्वागत किया। श्रीरामलीला कमेटी की ओर से अतिथियों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। श्रीरामलीला के प्रारंभ में जनकपुर के राजा जनक अपनी पुत्री जानकी के विवाह के लिए स्वयंवर आयोजित करते है। आमंत्रण पाकर ऋषि विश्वामित्र भी श्रीराम-लक्ष्मण को लेकर जनकपुर पहुंचते है। सुबह राजकुमारी जानकी अपनी सखियों के साथ बाग में माता गौरी की पूजा करने आती है। वही बाग में टहल रहे श्रीराम पर उनकी नज़र पड़ती है और वे मन ही मन माता गौरी से श्रीराम को अपने वर के रूप में मांगती है। इधर राजा जनक के दरबार मे स्वयंवर की तैयारियां पूरी हो चुकी है। ऋषि विश्वामित्र के साथ श्रीराम-लक्ष्मण और कई देशों के राजा व राजकुमार इस स्वयंवर में भाग लेने पहुंचते है। उन्हें बताया जाता है कि जो भी राजा या राजकुमार भगवान शिव के प्राचीन धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, राजकुमारी जानकी उसी को अपना वर चुनकर उसके साथ विवाह करेगी। सभी राजा और राजकुमार शिव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास करते है लेकिन वे उसे उठाना तो दूर हिला भी नही सके। इसी बीच स्वयंवर में पाताललोक के राजा बली का पुत्र बाणासुर पहुंचता है। बाणासुर ने राजा जनक को अपना परिचय देकर इस स्वयंवर से खुद को अलग कर लेता है। तभी वहां लंकापति रावण भी पहुंच जाता है। घमंडी रावण अपने आपको सर्वश्रेष्ठ साबित करने के लिए काफी बड़ी-बड़ी बातें करता है जिस पर बाणासुर लंकापति रावण को उसकी कमजोरियां बताकर ऐसी बड़ी-बड़ी बातें नही बोलने को कहता है।

उन दोनों के बीच काफी बहस होती है। अंत मे रावण श्रीराम को ईश्वर के रूप में पहचान लेता है। वह श्रीराम को अपना मोक्ष दाता मानकर वहां से चला जाता है लेकिन जाते समय राजकुमारी जानकी को एक बार लंका अवश्य दिखाने की चेतावनी दे जाता है। जब सभा मे मौजूद सभी राजा और राजकुमार शिव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने में विफल रहते है तो राजा जनक चिंतित हो उठते है। वे पृथ्वी को वीरों से खाली बताते है तो सभा में मौजूद लक्ष्मण गुस्से में उठ खड़े होते है और राजा जनक से अपने शब्द वापस लेने को कहते है। तब ऋषि विश्वकर्मा का संकेत पाकर श्रीराम उठते है और शिव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास करते है। जैसे ही वे शिव धनुष को उठाते है, धनुष टूटकर दो भागों में बंट जाता है। सभा मे श्रीराम की जय-जयकार हो उठती है। राजकुमारी जानकी सभा मे आकर श्रीराम को वरमाला पहना देती है। चारो तरफ शहनाइयों की गूंज सुनाई देने लगती है। तभी वहां परशुराम पहुंच जाते है। वे भगवान शिव का प्राचीन धनुष टूटा देखकर आग बबूला हो उठते है। उनकी लक्ष्मण के साथ काफी बहसबाज़ी होती है। श्रीराम लक्ष्मण को शांत करते है और परशुराम की शंका का समाधान करते है। जिस पर परशुराम प्रसन्न होकर वहां से चले जाते है। राजा जनक अयोध्या में दूत भेजकर महाराजा दशरथ को श्रीराम-जानकी के विवाह की सूचना देते है। जिस पर महाराजा दशरथ पूरे गाजे-बाजे के साथ बारात लेकर जनकपुर पहुंचते है। जनकपुर में श्रीराम-जानकी का पूरे वैदिक विधि विधान और रस्मो रिवाज के साथ धूमधाम से विवाह संपन्न होता है। राजा जनक बड़े भाव के साथ जानकी को श्रीराम के साथ अयोध्या के लिए रवाना करते है। जिस ओर वहां उपस्थित दर्शकों ने खूब तालियां बजाई और श्री राम-जानकी के जयघोष के साथ कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। वहां उपस्थित दर्शकों ने वृंदावन से आये श्री रामलीला के कलाकारों के अभिनय को खूब सराहा। इस अवसर पर श्रीरामलीला कमेटी के उपाध्यक्ष ओपी पारीक, कोषाध्यक्ष व सचिव राजेश वर्मा, सह सचिव प्रवीण फुटेला, प्रेस प्रवक्ता सुभाष चौहान, कला मंच के डायरेक्टर अशोक जसरासरिया, कला मंच के अध्यक्ष सुखराम वर्मा, सुल्तान शर्मा, देवेंद्र गोयल, बसंत सरिया, त्रिलोक जोशी, मुरारी जसरासरिया, धर्मवीर धोकरवाल, सोनू बत्तरा, मनीष मक्कड़, अंकित जिंदल, नवशेर मान, टीकम चोटिया, चांद माही, सिकन्दर सागर व नरेंद्र गिदडा सहित अन्य कई गणमान्य जन भी उपस्थित थे।

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