देश की सबसे लग्ज़री ट्रेन महाराजा एक्सप्रेस मथुरा-वृंदावन पहुंची राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, जानें इसकी खासियत
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने वृंदावन और मथुरा का किया दौरा, बांके बिहारी और श्रीकृष्ण जन्मस्थान में किए दर्शन
मथुरा/वृंदावन। राष्ट्रपति ने वृंदावन और मथुरा का दौरा किया – राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 25 सितंबर 2025 को विशेष ट्रेन द्वारा नई दिल्ली से वृंदावन (उत्तर प्रदेश) की यात्रा की। इस एक दिवसीय दौरे के दौरान उन्होंने वृंदावन और मथुरा के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर पहुंचकर पूजा-अर्चना की।
राष्ट्रपति मुर्मु ने श्री बांके बिहारी मंदिर में दर्शन किए और विधिवत पूजा संपन्न की। इसके बाद उन्होंने निधिवन, सुदामा कुटी, कुब्जा कृष्ण मंदिर और श्री कृष्ण जन्मस्थान जाकर श्रद्धा के साथ दर्शन किए।
इस दौरान मंदिरों में राष्ट्रपति के स्वागत के लिए भक्तों और स्थानीय नागरिकों की भारी भीड़ उमड़ी। मंदिर प्रबंधन समितियों ने उनका पारंपरिक तरीके से अभिनंदन किया।
राष्ट्रपति का यह दौरा न केवल धार्मिक महत्व का रहा बल्कि इससे वृंदावन और मथुरा की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक धरोहर को राष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर विशेष पहचान मिली। खास बात यह है कि राष्ट्रपति इस बार हवाई जहाज से नहीं बल्कि देश की सबसे लग्ज़री ट्रेन महाराजा एक्सप्रेस से मथुरा पहुंची।
महाराजा एक्सप्रेस: चलता-फिरता राष्ट्रपति भवन
महाराजा एक्सप्रेस 16 कोच वाली खास ट्रेन है, जिसे चलते-फिरते राष्ट्रपति भवन की तरह डिज़ाइन किया गया है। इसमें दो इंजन, दो पावर कार, तीन जूनियर सूट, दो रेस्टोरेंट (मयूर महल और रंग महल), दो लाउंज (राजह क्लब और सफारी), एक प्रेसिडेंट सूट (नवरत्न), दो सूट, एक किचन और एक स्टाफ कोच शामिल है।
हर कोच का अलग नाम और भूमिका
ट्रेन के हर कोच का एक अलग नाम और उद्देश्य है। जैसे मेडिकल टीम ‘नीलम’ नामक सूट में सफर करती है, राष्ट्रपति परिवार ‘हीरा’ कोच में यात्रा करता है, जबकि राष्ट्रपति का प्रेसिडेंट सूट ‘नवरत्न’ कहलाता है।
शाही सुविधाएं और सुरक्षा
पूरी ट्रेन वातानुकूलित है और बीच रास्ते में रुकने की अनुमति सिर्फ आपात स्थिति में होती है। भोजन की तैयारी राष्ट्रपति भवन के प्रशिक्षित शेफ द्वारा की जाती है। सुरक्षा के लिए भारी संख्या में अधिकारी और सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं, जिससे यह ट्रेन शाही महल जैसी लगती है।
27 महीने बाद रेल यात्रा
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इससे पहले जून 2023 में भुवनेश्वर से अपने गृहनगर रायरंगपुर तक ट्रेन से सफर किया था। लगभग 27 महीने बाद वह एक बार फिर रेल यात्रा कर रही हैं।
राष्ट्रपति का यह दौरा न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि उनकी खास ट्रेन और उसकी भव्य झलक भी आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
