धान क्रय केंद्र बनाने में भ्रष्टाचार का काला चेहरा! दागी समितियों पर केंद्र खोल, ईमानदारों को ठुकराया

अम्बेडकरनगर। उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर जिले में धान क्रय केंद्रों की स्थापना में पारदर्शिता के सरकारी दावे पूरी तरह ध्वस्त होते दिख रहे हैं। जिला स्तर पर ए.आर. कोऑपरेटिव राघवेंद्र प्रताप शुक्ला पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उन्होंने शासनादेश की खुलेआम अवहेलना करते हुए उन्हीं समितियों पर केंद्र खोल दिए, जिन पर पहले से एफआईआर दर्ज है या सचिव गबन के मामलों में आरोपी हैं।

किसानों का कहना है कि यह घोटाला उनकी मेहनत और विश्वास पर सीधा डाका है। कई समितियां जिनका रिकॉर्ड साफ-सुथरा रहा, उन्हें अचानक बंद कर दिया गया, जबकि दागी रिकॉर्ड वाली समितियों को तरजीह दी गई। इससे ईमानदार कर्मचारियों की अनदेखी हो रही है और भ्रष्ट तत्व फायदा उठा रहे हैं।

शासनादेश के अनुसार, धान क्रय केंद्र का संचालन केवल उन नियमित कर्मचारियों से कराया जाना चाहिए जिनकी सेवा अवधि कम से कम दो वर्ष शेष हो। लेकिन वास्तविकता यह है कि कई जगह बिना स्थाई कर्मचारी के केंद्र चलाए जा रहे हैं, यहां तक कि कुछ सचिवों को जिम्मेदारी दी गई है जो समिति के स्थाई सदस्य भी नहीं रहे।

किसान संगठनों ने आरोप लगाया है कि यह पूरा खेल ए.आर. कोऑपरेटिव और स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे।

इस मुद्दे ने सोशल मीडिया पर भी जोर पकड़ा है। #धान_खरीद_केंद्र_घोटाला ट्रेंड कर रहा है और लोग जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

किसानों का साफ संदेश है – “ईमानदारों को सम्मान दो, भ्रष्टाचारियों को संरक्षण बंद करो, वरना विश्वास की नींव हिल जाएगी।”

 

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