- रिपोर्ट- मनोज यादव
एटा :- सीमा की रक्षा करने वाले जवानों का मनोबल ही उनका सबसे बड़ा शस्त्र होता है। यही कारण है कि केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने अपने कर्मियों और उनके परिवारों के मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने के लिए एक ऐतिहासिक पहल की है। हाल ही में सीआईएसएफ ने आदित्य बिड़ला एजुकेशन ट्रस्ट की प्रतिष्ठित पहल Mpower के साथ अपने समझौता ज्ञापन (MoU) को अगले तीन वर्षों के लिए बढ़ाकर एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे सिर्फ सीमा सुरक्षा के प्रहरी ही नहीं, बल्कि संवेदनशील नेतृत्व के प्रतीक भी हैं।
Mpower द्वारा चलाया जा रहा “प्रोजेक्ट मन” अब 21 शहरों में परामर्शदाता उपलब्ध कराएगा। यह पहल सीआईएसएफ कर्मियों और उनके परिजनों को तनाव, अवसाद, चिंता और मानसिक दबाव जैसी चुनौतियों से लड़ने का अवसर देगी। अब जवान केवल हथियारों से ही नहीं, बल्कि मजबूत मानसिक स्वास्थ्य से भी लैस होंगे। यह पहल दर्शाती है कि राष्ट्र की सुरक्षा में लगे सिपाही को मनोबल की नई ऊँचाई दी जा रही है।
आज जब समाज में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर झिझक और संकोच मौजूद है, तब सीआईएसएफ का यह निर्णय उदाहरण है कि मानसिक स्वास्थ्य शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही जरूरी है। जवान जो दिन-रात ड्यूटी पर रहते हैं, उन्हें अब अपनी भावनाओं को समझने और साझा करने का मंच मिलेगा। उनके परिवारों को भी इस योजना का सीधा लाभ मिलेगा, जिससे एक सुदृढ़ और संतुलित पारिवारिक वातावरण का निर्माण होगा।
यह समझौता सिर्फ कागज पर लिखी औपचारिकता नहीं, बल्कि जवानों की धड़कनों में नई ऊर्जा और हिम्मत भरने वाला संकल्प है। यह पहल मानसिक स्वास्थ्य को मुख्यधारा में लाने की दिशा में मील का पत्थर है।
आज देशवासियों को गर्व होना चाहिए कि हमारे सुरक्षा प्रहरी सिर्फ सीमाओं की रक्षा ही नहीं कर रहे, बल्कि अपने
भीतर भी अटूट मानसिक शक्ति का निर्माण कर रहे हैं।
थर्मल पावर प्लांट एटा में तैनात CISF के डिप्टी कमांडेंट जसवीर सिंह ने कहा कि सीआईएसएफ और Mpower का यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सशक्त संदेश है— “मजबूत मन, मजबूत राष्ट्र।”
