जब भगवान विष्णु ने लिया वराह अवतार और बचाई पृथ्वी…
जानें वराह अवतार की पौराणिक कथा। कैसे भगवान विष्णु ने हिरण्याक्ष राक्षस से भयंकर युद्ध कर पृथ्वी को गर्भोदक सागर से बाहर निकाला और धर्म की रक्षा की।सनातन धर्म के अनुसार वराह अवतार दशावतार में तीसरा माना जाता है। पढ़ें यह कथा जब भगवान विष्णु ने जंगली सूअर का रूप धारण कर पृथ्वी की रक्षा की।वराह अवतार कथा: जब हिरण्याक्ष ने पृथ्वी छिपाई और भगवान विष्णु ने वराह रूप लेकर धर्म की पुनर्स्थापना की।
नई दिल्ली। सनातन धर्म के ग्रंथों के अनुसार जब-जब पृथ्वी पर संकट आया है, तब-तब भगवान विष्णु ने अवतार लेकर संसार की रक्षा की है। इन्हीं में से एक है वराह अवतार, जो भगवान विष्णु के दस अवतारों (दशावतार) में तीसरा माना जाता है। इस अवतार के पीछे की कथा बेहद रोचक और महत्वपूर्ण है।
राक्षस हिरण्याक्ष ने किया था पृथ्वी का अपहरण
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हिरण्याक्ष नामक राक्षस ने अपने वरदान का दुरुपयोग कर पृथ्वी को ब्रह्मांडीय गर्भोदक सागर (Cosmic Ocean) में छिपा दिया। यह सागर इतना विशाल था कि उसमें हजारों पृथ्वियां समा सकती थीं, इसलिए पृथ्वी को ढूंढ पाना लगभग असंभव था।
पृथ्वी की रक्षा के लिए प्रकट हुए वराह अवतार
इस संकट से निपटने के लिए भगवान विष्णु ने वराह (जंगली सूअर) का रूप धारण किया। धार्मिक ग्रंथों में वर्णन है कि वराह की ऊंचाई लगभग 75,000 किलोमीटर और चौड़ाई 40,000 किलोमीटर तक बताई गई है, जो पृथ्वी को सुरक्षित बाहर लाने के अनुरूप थी।
वराह रूप ही क्यों चुना गया?
धार्मिक विद्वानों का मानना है कि जंगली सूअर कीचड़ और मिट्टी में खोदकर चीजों को निकालने में सक्षम होता है। उसकी थूथनी खोदने और सूंघने में निपुण होती है। यही कारण है कि भगवान विष्णु ने पृथ्वी को सागर से बाहर निकालने के लिए वराह अवतार धारण किया।
हिरण्याक्ष से युद्ध और पृथ्वी की पुनर्स्थापना
कथाओं के अनुसार, वराह अवतार गर्भोदक सागर की गहराइयों में पहुंचे और वहां पृथ्वी को खोज निकाला। तभी उनका सामना राक्षस हिरण्याक्ष से हुआ। भयंकर युद्ध के बाद भगवान वराह ने उसे पराजित कर दिया और पृथ्वी को अपने दांतों पर उठाकर सागर से बाहर सुरक्षित ले आए।
यह भी पढ़ें- क्या घर में कुत्ता पालना शास्त्रों के अनुसार सही है? प्रेमानंद जी महाराज ने दिया जवाब, जानिए क्या है मान्यता
वराह अवतार का महत्व
वराह अवतार न केवल पृथ्वी की रक्षा का प्रतीक है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि जब-जब अधर्म और अत्याचार बढ़ते हैं, तब-तब भगवान विष्णु धर्म की पुनर्स्थापना के लिए अवतरित होते हैं।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि khabrejunction.com नहीं करता। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
