‘असंवैधानिक’: बिहार में वोटर लिस्ट संशोधन के खिलाफ याचिकाओं पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

बिहार की वोटर लिस्ट पर विशेष पुनरीक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल

पटना: बिहार में चुनाव आयोग द्वारा किए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को “मनमाना” और “असंवैधानिक” बताते हुए कई याचिकाएं आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं। याचिकाकर्ताओं में एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR), सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा और कुछ राजनीतिक दल शामिल हैं।

अक्टूबर-नवंबर में होने हैं बिहार विधानसभा चुनाव
बिहार में विधानसभा चुनाव इस साल अक्टूबर-नवंबर में संभावित हैं। आमतौर पर चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में संशोधन होता है, लेकिन याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह SIR पहली बार पूरे राज्य में सभी मतदाताओं को फिर से अपनी पात्रता सिद्ध करने को कह रहा है — जो असंवैधानिक है।

क्या है विशेष सघन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR)?
24 जून को निर्वाचन आयोग (ECI) ने बिहार में SIR की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य योग्य मतदाताओं को जोड़ना और अपात्र लोगों को हटाना बताया गया।

आयोग ने इसके पीछे शहरीकरण, प्रवास, नए 18+ मतदाताओं का नाम न जुड़ पाना और मृत्यु दर्ज न होने जैसे कारण गिनाए। साथ ही विदेशी अवैध प्रवासियों के नाम वोटर लिस्ट से हटाने की बात भी कही गई।

विपक्ष के आरोप: दस्तावेज़ नहीं तो वोट नहीं
विपक्षी दलों का आरोप है कि यह प्रक्रिया कई योग्य मतदाताओं को केवल दस्तावेज़ों के अभाव में बाहर कर सकती है।

याचिकाओं में कहा गया है कि SIR प्रक्रिया में ‘बोझ का भार’ नागरिकों पर डाल दिया गया है, जिसमें उन्हें 25 जुलाई, 2025 तक नए आवेदन और नागरिकता के प्रमाण देने होंगे।

Aadhaar और राशन कार्ड जैसे आम दस्तावेजों को मान्यता नहीं दी गई है, और माता-पिता की पहचान का प्रमाण भी जरूरी बताया गया है — जो विशेष रूप से प्रवासियों और गरीब तबकों के लिए कठिन है।

मॉनसून, बाढ़ और BLO की कमी भी बना मुद्दा
ADR ने यह भी कहा है कि इतनी बड़ी प्रक्रिया के लिए एक लाख ब्लॉक लेवल ऑफिसर्स (BLOs) की जरूरत होगी, जिसे बिहार में मॉनसून और बाढ़ के बीच कर पाना असंभव है।

इसलिए याचिकाओं में SIR पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।

चुनाव आयोग का जवाब: संवैधानिक अधिकार के तहत कार्य
चुनाव आयोग ने अपनी अधिसूचना और समयसीमा को सही ठहराते हुए संविधान के अनुच्छेद 326 का हवाला दिया है।

इसके अनुसार, “प्रत्येक भारतीय नागरिक जिसकी उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक हो और जिसे कानून द्वारा अयोग्य न ठहराया गया हो, उसे मतदान का अधिकार है।”

आयोग ने यह भी बताया कि अब तक 7.9 करोड़ मतदाताओं में से 57% से अधिक ने नई एंट्री फॉर्म जमा कर दिए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

बिहार बंद और विरोध प्रदर्शन
9 जुलाई को बिहार बंद के दौरान कांग्रेस और INDIA गठबंधन के कार्यकर्ताओं ने SIR के विरोध में प्रदर्शन किया। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।

बिहार में चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में चल रही विशेष सघन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत में संवैधानिक सवाल उठ खड़े हुए हैं। एक ओर जहां चुनाव आयोग इसे न्यायोचित और संवैधानिक बता रहा है, वहीं याचिकाकर्ता इसे मतदाता अधिकारों का उल्लंघन मान रहे हैं। अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस विवाद पर क्या फैसला देता है।

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