जैसे अशोक गहलोत ने गजेंद्र सिंह शेखावत का नाम संजीवनी घोटाले में शामिल करवाया, वैसे ही भजनलाल शर्मा ने हटवा दिया 

गहलोत बताए कि भूपेंद्र यादव, संजय क्षोत्रिय से लेकर आईपीएस एमएल लाठर को उपकृत क्यों किया?भजनलाल शर्मा ने भी राजस्थान लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष बनाकर डीजीपी यूआर साहू को उपकृत ही किया है।

  • रिपोर्ट- एस.पी.मित्तल

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत जानना चाहते हैं कि बहुचर्चित संजीवनी को ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी के घोटाले से केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और उनके परिजन के नाम एसओजी ने क्यों हटा दिए। गहलोत ने अपनी यह इच्छा सोशल मीडिया के माध्यम से दर्शाया है। गहलोत ने लिखा है कि जब वे मुख्यमंत्री थे, तब एसओजी ने अपनी जांच में शेखावत और उनके परिजन को भी घोटाले का आरोपी माना था, लेकिन अब एसओजी ने दिल्ली की अदालत में जो रिपोर्ट दी है, उसमें शेखावत और उनके परिजन को आरोप नहीं माना है। गहलोत यह जानना चाहते हैं कि आखिर एसओजी की कौनसी जांच रिपोर्ट झूठी है। सवाल उठता है कि गहलोत क्या नासमझ राजनीतिज्ञ है। जिस प्रकार मुख्यमंत्री और गृहमंत्री रहते हुए गहलोत ने शेखावत का नाम संजीवनी घोटाले में शामिल करवाया, उसी प्रकार मौजूदा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गृह मंत्री का प्रभार रहते हुए घोटाले से शेखावत का नाम हटवा दिया। एसओजी किस तरह काम करती है, इसे अशोक गहलोत तो बहुत अच्छी तरह जानते है। गहलोत ने अपने कार्यकाल में तीन आईपीएस को पुलिस महानिदेशक बनवाया। सब जानते हैं कि संजय श्रोत्रिय तो महानिदेशक भी नहीं थे, लेकिन फिर भी राजस्थान लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया। भूपेंद्र यादव को तो डीजीपी के पद से इस्तीफा दिलवाकर आयोग का अध्यक्ष बनाया। कई आईपीएस की वरिष्ठता को लांघकर एमएल लाठर को महानिदेशक बनाने का कारनामा भी राजस्थान की जनता ने देखा है। जब डीजीपी स्तर के अधिकारियों को उपकृत किया जा रहा हो तो फिर एसओजी तो इशारे पर ही उछल कूद करेगी। अधिकारियों को उपकृत कर जिस तरह शेखावत का नाम घोटाले में शामिल करवाया उसी तरह अब शेखावत का नाम हटवा भी दिया गया है। मौजूदा भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी डीजीपी यूआर साहू को राजस्थान लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष बनाया है। यदि यूआर साहू आईपीएस की सेवा से ही रिटायर होते तो एक वर्ष बाद सेवानिवृत्ति हो जाती, लेकिन आयोग का अध्यक्ष बनाने के बाद साहू को एक वर्ष का सेवा विस्तार स्वत: ही मिल गया है। अशोक गहलोत ने भी पूरे पांच वर्ष गृह विभाग अपने पास ही रखा और अब मौजूदा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी गृह विभाग को अपने पास रखे हुए है। जिस प्रकार एसओजी गहलोत के शासन में गृह विभाग के अधीन थी, उसी प्रकार अभी भी एसओजी गृह विभाग के अधीन है। अशोक गहलोत को शायद यह मुगालता रहा कि एसओजी एक बार गजेंद्र सिंह शेखावत का नाम शामिल कर देगी तो फिर हटाना मुश्किल होगा। लेकिन गहलोत को एसओजी के अधिकारियों की कलाबाजियों की जानकारी नहीं रही। एसओजी के अधिकारी तो इशारों पर ही काम करते हैं।

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