2015 फेक एनकाउंटर मामला: सुप्रीम कोर्ट ने 11 पुलिस मुलाजिमों की याचिका खारिज की, परिवार को इंसाफ की उम्मीद
अमृतसर, 18 जून: अमृतसर के वेरका इलाके में वर्ष 2015 में हुए एक कथित फेक एनकाउंटर मामले में नया मोड़ आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें पंजाब पुलिस के 11 मुलाजिमों ने धारा 302 (हत्या) को हटाने की अपील की थी। इस एनकाउंटर में अकाली नेता मुखजीत सिंह की मौत हो गई थी, जिन्हें पुलिस ने गलती से गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया समझ लिया था।
परिवार के अनुसार, 2015 में पुलिस को सूचना मिली थी कि कुख्यात अपराधी जग्गू भगवानपुरिया गाड़ी में सफर कर रहा है। वेरका क्षेत्र में पुलिस ने नाकेबंदी कर एक गाड़ी पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी, जिसमें 25 से अधिक गोलियां अकाली नेता मुखजीत सिंह को लगीं और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
पुलिस द्वारा पास जाकर देखने पर पता चला कि मृतक कोई अपराधी नहीं बल्कि निर्दोष अकाली नेता था। तभी से परिवार लगातार 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ न्याय की लड़ाई लड़ रहा है।
परिवार ने बताया कि पंजाब पुलिस के 11 अधिकारियों ने इस मामले में अपने खिलाफ दर्ज धारा 302 को हटाने के लिए पहले हाईकोर्ट और अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने नामंजूर कर दिया है।
युवराज सिंह, जो मृतक के भतीजे हैं, ने कहा, “हमें विश्वास है कि अब हमें जरूर इंसाफ मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से हमारी उम्मीदें फिर से जागी हैं।”
मृतक की पत्नी हरजीत कौर ने भी कोर्ट के इस फैसले को इंसाफ की दिशा में बड़ा कदम बताया।
