तहसील स्वार में विस्थापित परिवारों की समस्याओं पर उच्चस्तरीय बैठक, राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख की अध्यक्षता में हुआ विचार-विमर्श

रामपुर: आजादी के बाद विभिन्न स्थानों से रामपुर जनपद की तहसील स्वार में विस्थापित होकर आए परिवारों और किसानों की समस्याओं के समाधान हेतु एक महत्वपूर्ण बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख ने की। जिलाधिकारी श्री जोगिंदर सिंह और पुलिस अधीक्षक श्री विद्यासागर मिश्र भी इस अवसर पर मौजूद रहे।

बैठक में बताया गया कि स्वतंत्रता के उपरांत तहसील स्वार के 23 गांवों में कुल 2156 विस्थापित परिवारों ने निवास किया था। वर्तमान में इनमें से 16 गांव आबाद हैं जबकि 7 गांव गैर आबाद हो चुके हैं।

वर्ष 2020-21 के सर्वेक्षण के अनुसार:

86.9835 हेक्टेयर भूमि पर 16 गांवों में विस्थापित परिवारों की आबादी बस चुकी है।

1816.2774 हेक्टेयर भूमि पर 15 गांवों में विस्थापित परिवार कृषि कार्य कर रहे हैं।

कुल मिलाकर 1903.2609 हेक्टेयर भूमि का प्रयोग विस्थापित परिवारों द्वारा किया जा रहा है।

इस बैठक में जिला वन अधिकारी (DFO) प्रणव जैन, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व हेम सिंह, अपर जिलाधिकारी प्रशासन डॉ नितिन मदान और एसडीएम स्वार अमन देओल सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।

राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विस्थापित परिवारों की भूमि, निवास और आजीविका से जुड़ी समस्याओं का प्राथमिकता पर समाधान किया जाए, जिससे उन्हें स्थायी रूप से राहत मिल सके।

जिलाधिकारी जोगिंदर सिंह ने भरोसा दिलाया कि प्रशासन पारदर्शी प्रक्रिया के तहत सभी पात्र परिवारों को उनका हक दिलाने के लिए तत्पर है।

विकास भवन सभागार में पशुधन मंत्री ने की विभागीय समीक्षा बैठक
रामपुर। उत्तर प्रदेश के पशुधन, दुग्ध विकास, राजनैतिक पेंशन मंत्री धर्मपाल सिंह ने मुख्य विकास अधिकारी नन्द किशोर कलाल एवं जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में विकास भवन सभागार में पशुपालन विभाग के अंतर्गत योजनाओं एवं कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के सम्बन्ध में समीक्षा बैठक की गई।
मंत्री ने सभी पशु चिकित्साधिकारियों को निर्देशित किया कि नियमित रूप से गौशालाओं का निरीक्षण अवश्य करें और सभी पशु चिकित्सा अधिकारी संबंधित खंड विकास अधिकारियों से संपर्क स्थापित करते हुए कार्य करें।
उन्होंने जिला पंचायतराज अधिकारी को निर्देशित किया कि राज्य वित्त आयोग की धनराशि को गौशालाओं के लिए भी नियमानुसार खर्च करें। उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने में पशुपालन विभाग अहम भूमिका निभाता है। किसानों को खेती करने के साथ-साथ पशुपालन करने के लिए भी अधिकारी प्रेरित करें।
बैठक के दौरान पशुधन मंत्री ने जनपद के समस्त जनप्रतिनिधियों को गौशालाओं में भूसा दान करने के लिए कहा, जिसे सभी ने सहर्ष स्वीकार किया। उन्होंने सभी पशु चिकित्सा अधिकारियों को निर्देशित किया कि नस्ल सुधार पर ध्यान दें एवं कृत्रिम गर्भाधान करायें, जिससे दुग्ध उत्पादन को बढ़ाया जा सके।
पशुओं में होने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए समय-समय पर उनका टीकाकरण अवश्य करायें। किसानों की आमदनी को बढ़ाने का सबसे अच्छा स्रोत पशुपालन है, जिसके लिए सरकार विभिन्न योजनाएं चला रही है। वर्तमान में बकरी पालन, शूकर पालन, नंदिनी कृषक योजना, मुर्गी पालन, मुख्यमंत्री सहभागिता योजना जैसी विभिन्न योजनाएं संचालित हैं। उन्होंने सभी खंड विकास अधिकारियों को निर्देशित किया कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पशुपालकों के हित में चलाई जा रही सभी योजनाओं का व्यापक प्रचार प्रसार करायें, जिससे किसान योजना का लाभ ले सकें और अपनी आय को दोगुना कर सकें।
बैठक में जनप्रतिनिधियों सहित एसडीएम सदर मोनिका सिंह, परियोजना अधिकारी, डीआरडीए डी.एन. तिवारी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी वेद प्रकाश, जिला पंचायतराज अधिकारी जाहिद हुसैन एवं समस्त खंड विकास अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक मे पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने विकास भवन सभागार में प्रेस प्रतिनिधियों से बात की। उन्होंने कहा कि जैव विविधता से परिपूर्ण उत्तर प्रदेश में पूरे देश का सर्वाधिक पशुधन है। वर्ष 2019 की 20वीं पशु गणना के अनुसार प्रदेश में 190.20 लाख गोवंश, 330.17 लाख महिषवंश, 9.85 लाख भेड़, 144.80 लाख बकरी एवं 4.09 लाख सूकर है। वर्ष 2025, 21वीं पशुगणना क्रमित है। वर्ष 2023-24 में 387.79 लाख मी० टन दुग्ध उत्पादन, 589.48 करोड़ अण्डा उत्पादन, 1259.00 हजार टन मांस उत्पादन तथा 8.29 लाख कि०ग्र० ऊन उत्पादन हुआ।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में अद्यतन अस्थाई गोआश्रय स्थल-6740, गोवंश वन्य बिहार/वृहद गोसरंक्षण केन्द्र-372, कांजी हाउस-306, कान्हा गोशाला-295, अर्थात कुल 7713 गो-आश्रय स्थलों में 12,48,321 गोवंश संरक्षित। वर्तमान में प्रदेश में कुल 171 वृहद गौ संरक्षण केन्द्र निर्माणाधीन। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना तथा पोषण मिशन अन्तर्गत 1,10,482 पशुपालकों को अद्यतन 1,71,628 गोवंश सुपुर्द’ भरण-पोषण हेतु रू0 50.00 प्रति दिन प्रति गोवंश की दर से डीबीटी के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2024-25 में 2040.835 करोड़ रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया। प्रदेश में अभियान चलाकर अद्यतन 9,449.82 हेक्टेयर गोचर भूमि कब्जामुक्त, उक्त में से 5458.93 हे0 भूमि पर नेपियर तथा अन्य हरा चारा रोपित किया गया। 6726 गौ आश्रय स्थलों सें गोचर भूमि टैग्ड किया गया।
मंत्री ने कहा कि प्रदेश के पशुपालकों के द्वार पर चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मोबाइल वेटरिनरी यूनिट योजना अन्तर्गत एमवीयू संचालित (टोल फ्री नं0-1962 पर निःशुल्क काल)। प्रति एक लाख बड़े पशुधन की संख्या पर एक मोबाइल वेटरिनरी यूनिट की दर से कुल 520 मोबाइल वेटरिनरी यूनिट वर्तमान में प्रदेश में हाईब्रिड मोड में संचालित। मोबाईल वेटरिनरी यूनिट द्वारा वर्ष 2024-25 में 15.93 लाख पशुपालकों के 32.34 लाख पशुओं को चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध। योजना के न्तर्गत लगभग 1600 व्यक्तियों का रोजगार सृजन। वर्ष 2024-25 में कुल 1705.60 लाख टीकाकरण लक्ष्य के सापेक्ष अद्यतन 1648.89 लाख टीकाकरण, वर्ष 2024-25 में 216.30 लाख के सापेक्ष अद्यतन कुल 238.20 लाख कृत्रिम गर्भाधान। मिशन मिलियन अन्तर्गत 10 लाख गोवंशीय पशुओं को वर्गीकृत वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान किए जाने के 02 वर्षों के लक्ष्य के सापेक्ष वर्ष 2023-24 में मार्च 2024 तक 5.60 लाख कृत्रिम गर्भाधान तथा वर्ष 2024-25 में मार्च 2025 तक 4.09 लाख कृत्रिम गर्भाधान कुल 9.69 लाख कृत्रिम गर्भाधान (भौतिक रूप से) किया गया। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि प्रदेश में दुग्ध उत्पादन एवं नस्ल सुधार हेतु अतिहीमिकृत वीर्य उत्पादन केन्द्र हापुड़ में पूर्व संचालित लैब के अतिरिक्त रेहमानखेड़ा, लखनऊ में एक अतिआधुनिक सेक्सड सार्टेड स्ट्रा उत्पादन लैब की स्थापना की जा रही है, (विभागीय नवाचार) लैब के क्रियाशील उपरान्त लगभग 9 लाख स्ट्रा प्रति वर्ष उत्पादित होगा। भ्रूण प्रत्यारोपण लैब में आईवीएफ के माध्यम से वर्ष 2024-25 में अद्यतन कुल 58 भ्रूण का प्रत्यारोपण किया गया, जिसमें 16 नर एवं 9 मादा संतति अर्थात कुल 25 संततियों की प्रप्ति हुई। वित्तीय वर्ष 2024-25 में पं0 दीनदयाल उपाध्याय वृहद पशु आरोग्य शिविरों/मेलों (विकास खण्ड स्तरीय/मंडल स्तरीय) का आयोजन कर लगभग 10 लाख पशु पंजीकृत कर चिकित्सकीय लाभ प्रदान किया गया। जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना केन्तर्गत वर्ष 2024-25 में 1,73,300 लक्ष्य के सापेक्ष 1,62,383 पशु बीमित। वर्ष 2024-25 में 739 बकरी पालन इकाईयों के लक्ष्य के सापेक्ष 739 इकाईयां स्थापित। बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान (विभागीय नवाचार) में वर्ष 2024-25 में 11,025 लक्ष्य के सापेक्ष 8,657 कृत्रिम गर्भाधान। इस कार्य हेतु अद्यतन 828 पैरावेट प्रशिक्षित। वर्ष 2024-25 हेतु 225 भेड़ पालन इकाईयों के लक्ष्य के सापेक्ष 225 इकाईयां स्थापित। प्रदेश के भेड़ पालकों को उत्तराखण्ड राज्य से 250 रेमबुले नस्ल के उन्नत मेढ़े (विभागीय नवाचार) पूर्व चयनित 11 जनपदों में प्राप्त कर चयनित लाभार्थियों को वितरित किया गया।
पशुपालकों के हित में चलायी जा रही योजनाओं की जानकारी देते हुए मंत्री ने कहा कि उ0प्र0 कुक्कुट विकास नीति-2022 अन्तर्गत 155 इकाईयों की स्थापना हेतु ऑनलाइन लेटर ऑफ कम्फर्ट निर्गत। 316.72 करोड़ का अनुमानित निवेश एवं 13415 व्यक्तियों को प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप् से रोजगार सृजन सम्भावित। ब्याज प्रतिपूर्ति (अधिकतम 1 करोड़) प्रति इकाई का० लेयर (10000, 30000 एवं 60000) लागत के 70 प्रतिशत बैंक ऋण पर 7 प्रतिशत ब्याज प्रतिपूर्ति 5 वर्ष (60 माह) अधिकतम छूट। नीति अंतर्गत स्थापित प्रत्येक इकाई हेतु विद्युत् बिल में 10 वर्षों तक इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी पर (अधिकतम 1 लाख यूनिट तक) शत प्रतिशत छूट। नीति अंतर्गत स्थापित होने वाली इकाई हेतु क्रय की गयी भूमि अथवा लीज पर ली गयी भूमि पर स्टाम्प शुल्क में शत प्रतिशत छूट। पूर्व कुक्कुट विकास नीति अन्तर्गत स्थापित इकाईयों से 119.20 लाख अण्डा प्रतिदिन उत्पादित तथा ब्रायलर पैरेन्ट इकाईयों से 52.68 लाख चूजे प्रतिमाह उत्पादित। बुन्देलखण्ड पैकेज अन्तर्गत वर्ष 2024-25 में महिला समृद्धिकरण ब्रायलर पालन योजना में 22801 ब्रायलर पालन इकाईयां की स्थापना की कार्यवाही क्रमित (प्रति महिला लाभार्थी 150 ब्रायलर चूजे, कुक्कुट आहार एवं अन्य अवस्थापना सुविधायें निःशुल्क)। बैकयार्ड पोल्ट्री योजनान्तर्गत वर्ष 2024-25 में प्रदेश के कुक्कुट पालकों की आय में तथा उनके पोषण स्तर में सुधार हेतु 16666 इकाईयों के लक्ष्य के सापेक्ष शत प्रतिशत इकाईयां स्थापित। अतिरिक्त चारा बीज विकास कार्यक्रम वर्ष 2024-25 में रबी मौसम में 810.80 कु० बरसीम चारा बीज मिनीकिट निःशुल्क वितरित। जायद चारा बीज मिनीकिट निःशुल्क वितरित की कार्यवाही क्रमित।
विभागीय की नवीन योजनाएं. उत्तर प्रदेश चारा/आहार नीति (2024-29) के अन्तर्गत नैपियर घास की जड़ें/रूट स्लिप उपलब्ध कराने की योजना अन्तर्गत प्रदेश में हरे चारे की कमी को पूर्ण करने हेतु प्रश्नगत योजना के अन्तर्गत प्रथम वर्ष में विभागीय पशुधन प्रक्षेत्रों/तहसील स्तर पर 230.00 हे0 क्षेत्रफल में सीड बैंक तैयार करने की योजना स्वीकृत कर दी गयी है।
मोबाईल वेटनरी यूनिट के संचालन अन्तर्गत काल सेन्टर की विस्तृतीकरण योजना अन्तर्गत कॉल सेंटर से जुड़ने में पशुपालकों को वेटिंग पीरियड की समस्या से निराकरण हेतु योजना में लाईनों की वृद्धि एवं उस पर कार्यरत कार्मिकों के मानदेय इत्यादि के दृष्टिगत योजना स्वीकृत कर दी गयी है। पशुपालकों एवं पशुपालन विभाग के कार्मिकों के लिए प्रशिक्षण एवं प्रसार की योजना अन्तर्गत डेलाइट द्वारा की गयी संस्तुति के आधार पर प्रस्तावित प्रश्नगत योजनान्तर्गत 150 उपमुख्य पशु चिकित्सा अधिकारियों एवं पशु चिकित्सा अधिकारियों को पशु चिकित्सा महाविद्यालयों में मास्टर ट्रेनर्स के रूप में प्रशिक्षण दिया जायेगा। ये सभी मास्टर ट्रेनर्स फील्ड अधिकारियों एवं मैत्री पैरावेट्स को प्रशिक्षित करेंगे। प्रदेश स्तर पर 1865 उपमुख्य पशु चिकित्सा अधिकारियों/पशु चिकित्साधिकारी, 2000 पशुधन प्रसार अधिकारी तथा 9000 मैत्री पैरावेट्स को प्रशिक्षित किया जायेगा। सभी प्रशिक्षण वित्तीय वर्ष 2025-26 में एक ही बार कराये जायेगें। फील्ड अधिकारियों द्वारा 2,32,756 पशुपालकों को प्रशिक्षित किया जायेगा।
आदर्श प्रशिक्षण एवं उत्पादन केन्द्र, बक्सी का तालाब लखनऊ के सुदृढ़ीकरण योजना अन्तर्गत निर्बल वर्ग के प्रशिक्षार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से चर्म कला के तीन विधाओं यथा पशु शव उपयोग, चर्म शोधन एवं फुटवेयर एवं लेटर गुड्स में प्रशिक्षित करनं के साथ-साथ वातावरण को शुद्ध रखने के उद्देश्य से केन्द्र के सुदृढ़ीकरण/उच्चीकरण हेतु योजना स्वीकृत की गयी है।
सूकर पालन की योजना अन्तर्गत प्रदेश के गरीब, भूमिहीन परिवारों की आय में वृद्धि किये जाने के उद्देश्य से सूकर बाहुल्य जनपदों में 370 सूकर इकाईयां स्थापित कराये जाने का लक्ष्य प्रस्तावित किया गया है। जिसमें प्रति इकाई 1 नर 10 मादा सूकर पालकों को उपलब्ध करायी जायेगी। प्रति इकाई लागत रू0 1,34,000.00 है। प्रति इकाई पर 90 प्रतिशत राज्यांश (रू0 1,20,600.00) तथा 10 प्रतिशत लाभार्थी अंश (रू0 13,400.00) होगी। जिससे प्रदेश के गरीब परिवारों को आत्मनिर्भर कर सामाजिक एवं आर्थिक स्तर में सुधार हो सकें।
बकरी पालन की योजना अन्तर्गत प्रदेश के गरीब, अनुसूचित जाति के परिवारों की आय में वृद्धि किये जाने के उद्देश्य से 75 जनपदों में 750 बकरी सूकर इकाईयां स्थापित कराये जाने का लक्ष्य प्रस्तावित किया गया है। जिसमें प्रति इकाई 1 नर 5 मादा बकरी पालकों को उपलब्ध करायी जायेगी। प्रति इकाई लागत रू0 60,000.00 है । प्रति इकाई पर 90 प्रतिशत राज्यांश (रू0 54,000.00) तथा 10 प्रतिशत लाभार्थी अंश (रू0 6,000.00) होगी। जिससे प्रदेश के गरीब परिवारों को आत्मनिर्भर कर सामाजिक एवं आर्थिक स्तर में सुधार हो सके।
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