नई दिल्ली: बिजली क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एनटीपीसी (NTPC) और भारतीय सेना के बीच एक अहम समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत लद्दाख में सौर-हाइड्रोजन आधारित माइक्रोग्रिड से चौबीसों घंटे 200 किलोवाट अक्षय ऊर्जा की आपूर्ति की जाएगी। सेना ने एनटीपीसी के साथ 25 सालों के लिए बिजली खरीद समझौते (PPA) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता सेना की स्थायी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और हरित ऊर्जा को अपनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह समझौता?
लद्दाख के अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेना अब तक डीजल जेनरेटरों पर निर्भर थी, जो न केवल महंगे थे बल्कि प्रदूषण भी फैलाते थे। अब 4,400 मीटर की ऊंचाई पर स्थित चुशुल में एनटीपीसी का सौर-हाइड्रोजन माइक्रोग्रिड इन डीजल जनरेटरों की जगह लेने के लिए तैयार है। यह माइक्रोग्रिड माइनस 30 डिग्री सेल्सियस तक के बेहद ठंडे तापमान में भी प्रभावी रूप से कार्य करेगा।
एनटीपीसी का कहना है कि यह परियोजना दुनिया का सबसे अनूठा हाइड्रोजन-आधारित ऑफ-ग्रिड माइक्रोग्रिड है। इसका संचालन दूरदराज के हिमालयी सीमावर्ती क्षेत्रों में रक्षा बुनियादी ढांचे के डीकार्बोनाइजेशन और आधुनिकीकरण के लिए एक नया मानदंड स्थापित करेगा।
हरित ऊर्जा को मिलेगा बढ़ावा
भारत ने 2070 तक कार्बन उत्सर्जन को शून्य करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इसी दिशा में भारतीय सेना भी अक्षय ऊर्जा के प्रयोग को बढ़ावा दे रही है। सेना हाइड्रोजन-संचालित ट्रकों और बसों का परीक्षण कर रही है। अगर यह प्रयोग सफल रहता है, तो सेना में हाइड्रोजन-संचालित परिवहन वाहनों को शामिल किया जाएगा, जिससे ईंधन खर्च में कमी आएगी और कार्बन उत्सर्जन में कटौती होगी।
