गांव रोरी में वीर शिरोमणि महाराजा जवाहर सिंह के बलिदान दिवस पर कुश्ती दंगल का आयोजन

गांव रोरी में वीर शिरोमणि महाराजा जवाहर सिंह के बलिदान दिवस पर महाराजा सूरजमल अखाड़ा में कुश्ती दंगल का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महान योद्धा को श्रद्धांजलि देने के लिए खेलों का आयोजन किया गया, जिसे बाबा परमेन्द्र आर्य ने सच्ची श्रद्धांजलि बताया।

कार्यक्रम की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत महाराजा जवाहर सिंह के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर और दीप प्रज्वलित करके हुई। इस अवसर पर ग्रामीणों ने मुख्य अतिथि घणघस खाप चौधरी सुखपाल सिंह को फूल मालाओं और श्योराण खाप के स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। चौधरी सुखपाल सिंह ने कहा कि पहलवान खाप पंचायतों की मिलिट्री होते हैं, जो समाज और देश की रक्षा के लिए सदैव तैयार रहते हैं।

चौधरी सुखपाल सिंह का संदेश
चौधरी सुखपाल सिंह ने कहा कि जब-जब समाज और देश पर संकट आया है, तब-तब खाप चौधरियों और खापों के पहलवानों ने अपना बलिदान देकर देश और समाज की रक्षा की है। उन्होंने खाप चौधरियों से गांव-गांव में कुश्ती दंगलों का आयोजन कराने का आह्वान किया ताकि अधिक से अधिक बच्चे पहलवान बनें और समाज में फैल रही नशे की बीमारी से दूर रहें।

बाबा परमेन्द्र आर्य का वक्तव्य
महाराजा सूरजमल अखाड़े के संचालक और श्योराण खाप के चौधरी बाबा परमेन्द्र आर्य ने बताया कि वे प्रति वर्ष महाराजा जवाहर सिंह के बलिदान दिवस पर कुश्ती दंगल का आयोजन करते हैं। उन्होंने कहा कि महाराजा जवाहर सिंह अपने शासन काल में बहुत बलशाली थे और उन्होंने भरतपुर रियासत में कुश्ती और पहलवानों को काफी बढ़ावा दिया।

कुश्ती दंगल का आयोजन
दंगल में लड़कियों और लड़कों दोनों ने कुश्ती में अपना दमखम दिखाया। करीब 21 कुश्तियां हुईं, जिनमें विजेता पहलवानों को नगद राशि देकर सम्मानित किया गया। दंगल में आए हुए कोच और खलीफाओं को फूलमाला पहनाकर और श्योराण खाप का स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में योगदान
दंगल को सफल बनाने में पवन चौधरी बखरवा, ताऊ राजेन्द्र, दीपक पहलवान अमराला, अभिषेक पहलवान खंजरपुर, जयप्रकाश दुहाई, वेदप्रकाश थांबेदार, प्रेमपाल मास्टर जी, ब्रजवीर सिंह सहरावत, सतेन्द्र नेता, मुकेश चौधरी, दुष्यंत चौधरी, मनोज कुमार, शरणवीर पहलवान, चंद्रपाल फौजी, विनीत पहलवान आदि का विशेष योगदान रहा।

अगला दंगल
दंगल देखने के लिए दूर-दूर से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। कार्यक्रम के अंत में घोषणा की गई कि अगला दंगल 2 सितंबर को आयोजित किया जाएगा।

इस आयोजन ने महाराजा जवाहर सिंह के बलिदान दिवस को यादगार बना दिया और समाज में खेलों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 

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