नई दिल्ली: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष स्थान है और जब यह व्रत मंगलवार के दिन पड़ता है, तो इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। यह व्रत भगवान शिव, हनुमान जी और मंगल ग्रह की कृपा प्राप्त करने का उत्तम अवसर माना जाता है। यह कर्ज मुक्ति, शत्रु विजय और भूमि विवादों के निवारण में अत्यंत फलदायी होता है। आइए जानते हैं जुलाई 2025 में यह व्रत कब रखा जाएगा और इसका महत्व क्या है।
भौम प्रदोष व्रत का महत्व
मंगलवार को आने वाला प्रदोष व्रत ‘भौम प्रदोष’ कहलाता है। ‘भौम’ शब्द मंगल ग्रह का प्रतीक है, जो शक्ति, ऊर्जा और साहस का प्रतिनिधित्व करता है। इस दिन व्रत रखने और भगवान शिव की पूजा करने से:
- कर्ज से मुक्ति मिलती है
- शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है
- भूमि और संपत्ति संबंधी विवादों का समाधान होता है
- नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है
- आरोग्यता प्राप्त होती है
यह व्रत उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है जो आर्थिक या स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे हैं।
जुलाई 2025 में भौम प्रदोष व्रत की तिथि
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 22 जुलाई 2025, सुबह 07:05 बजे
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 23 जुलाई 2025, सुबह 04:39 बजे
इस बार भौम प्रदोष व्रत 22 जुलाई को मनाया जाएगा, क्योंकि उसी दिन मंगलवार और त्रयोदशी तिथि का संयोग बन रहा है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
- प्रदोष काल में पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है।
- पूजा का शुभ समय: 22 जुलाई को शाम 07:18 बजे से रात 09:22 बजे तक
इस समय भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। भक्तजन व्रत रखकर इस अवधि में शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित करते हैं।
भगवान शिव की पूजा से प्राप्त होते हैं ये लाभ
- आर्थिक कष्टों से मुक्ति
- मानसिक शांति और पारिवारिक सुख
- लंबी बीमारियों से राहत
- जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सफलता
जो भक्त सच्चे मन से व्रत रखते हैं और प्रदोष काल में शिव पूजन करते हैं, उन्हें भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
भौम प्रदोष व्रत एक ऐसा पावन अवसर है जो जीवन में शुभता, सफलता और स्वास्थ्य लाता है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए अत्यंत उपयोगी है जो ऋण, रोग या किसी बड़ी समस्या से ग्रस्त हैं। इस व्रत को श्रद्धा और विधि-विधान से करें, शिव कृपा अवश्य प्राप्त होगी।
