गुस्ताखी माफ हरियाणा —पवन कुमार बंसल
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मास्टर हुकम सिंह महान थे।
मैंने कई मुख्यमंत्रियों के साथ रिपोर्टिंग की है। हालाँकि वे चीफ मिनिस्टर थे, लेकिन सारी ताकत ओम प्रकाश चौटाला के पास थी। जनसत्ता में चंडीगढ़ नियुक्ति के दौरान उनसे मुलाकात होती रहती थी। वे मुझसे कहते—कोई काम बताया करो। मैं कहता—कोई काम नहीं होता।
एक दिन सुबह मैंने फोन करके कहा कि एक काम है। सादगी के प्रतीक मास्टर जी ने कहा—यह तो मेरा भाग्य है कि पवन कोई काम कह रहा है।
मैंने कहा कि पंचकूला की टेनिस खिलाड़ी रुचिका के पिता और कुछ अन्य लोग आपसे मिलने आ रहे हैं। पुलिस अफसर राठौर ने रुचिका से छेड़छाड़ की है और राठौर के रुतबे के चलते पंचकूला पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही। आप उनसे मिल लेना और बात सुन लेना।
वे मिले और मास्टर जी ने जाँच का आदेश दिया। फिर मुझे फोन करके कहा—पवन, मैं चीफ मिनिस्टर बाद में हूँ, एक लड़की का बाप पहले हूँ। रुचिका मेरी बेटी है। उसे न्याय मिलेगा।
यह अलग बात है कि बाद में खट्टर सरकार ने उसी राठौर को पंचकूला में 26 जनवरी के समारोह में मंच पर बिठाया।
मास्टर जी सोशलिस्ट पार्टी के फाउंडर थे।
मेहम कांड की रिपोर्टिंग से नाराज होकर तत्कालीन मुख्यमंत्री चौटाला ने पंचकूला में जिस सरकारी मकान में मैं रहता था, उसका आवंटन रद्द कर दिया था। हाई कोर्ट में केस भी चल रहा था।
मैं सचिवालय जाता था, लेकिन मास्टर जी से नहीं मिलता था। एक दिन लिफ्ट में मिल गए और उलाहना दिया कि पवन आता क्यों नहीं। मैंने कहा कि चौटाला साहिब नाराज न हो जाएँ। वे मुझे पकड़कर अपने ऑफिस ले गए और चाय पिलाई।
एक और बात का जिक्र। तब मास्टर जी ने चौटाला साहिब से कहा था कि आपने मकान रद्द करके अच्छा नहीं किया। पवन स्वाभिमानी है।
2009 में रोहतक में मेरी किताब “खोजी पत्रकारिता क्यों और कैसे” के विमोचन समारोह की अध्यक्षता भी मास्टर जी ने की थी।
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