जब तत्कालीन सीएम भजन लाल ने रोहतक के तत्कालीनडीसी गुलाब सिंह सरोत से पूछा कि ये पवन बंसल ने क्या लिख दिया जनसत्ता में
गुस्ताखी माफ, हरियाणा – पवन कुमार बंसल
जब भू-माफिया के मंसूबे पूरे नहीं होने दिए गए, तो झज्जर के तत्कालीन एस.डी.एम. फतेह सिंह डागर को निलंबित कर दिया गया। बहाना बनाया गया कि डागर के नरम रवैये से शराबबंदी आंदोलन भड़क उठा।
तत्कालीन मुख्यमंत्री भजन लाल ने रोहतक के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर गुलाब सिंह से पूछा कि पवन बंसल ने जनसत्ता में क्या लिख दिया।
किस्सा पुराना है। उस समय भजन लाल मुख्यमंत्री थे और बंसी लाल प्रदेश में शराबबंदी की मांग को लेकर आंदोलन चला रहे थे। अब सेवानिवृत्त हो चुके फतेह सिंह डागर तब झज्जर के एस.डी.एम. थे। मांगेराम शर्मा भजन लाल के मीडिया एडवाइजर थे।
मांगेराम शर्मा के जन्मदिन के अवसर पर झज्जर में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें शर्मा जी के अलावा तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष धर्मपाल मलिक और मंत्री तेजिंदर पाल मान भी मौजूद थे।
लेखक, जो उन दिनों रोहतक में जनसत्ता अखबार का रिपोर्टर था, ने देखा कि डागर मंच के बजाय मंच के पास सरकारी जीप में बैठे हैं। लेखक को कुछ असामान्य लगा। इधर-उधर जानकारी करने पर पता चला कि भू-माफिया झज्जर में इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के लिए अधिग्रहित जमीन को रिलीज करवाकर ग्राम पंचायत से जमीन दिलवाना चाहता है। इसी उद्देश्य से इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।
असल में अधिग्रहित जमीन की कीमत, साथ में सड़क बनने से, कई गुना बढ़ गई थी। लेखक ने तेजिंदर पाल मान से अनुरोध किया कि वह उनके साथ रोहतक जाना चाहता है। जैसे ही कार शहर से बाहर निकली, लेखक ने मान से कहा कि एक घर तो डायन भी छोड़ देती है, यदि आपका इसमें कोई हिस्सा है तो मैं खबर नहीं लिखूंगा।
इस पर मान साहब ने साफ कहा कि उनका इसमें कोई हिस्सा नहीं है। तब लेखक ने कहा कि उनकी तरफ से यह लिख देगा कि जमीन रिलीज नहीं की जाएगी। इसके बाद खबर लिख दी गई और मामला आगे नहीं बढ़ सका।
यह भी उल्लेखनीय है कि इससे पहले झज्जर के एस.डी.एम. आनंद मोहन शरण, जो अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, ने भी जमीन रिलीज की सिफारिश करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद उनका तबादला कर दिया गया था।
डागर निलंबित
कुछ समय बाद शराबबंदी को लेकर आंदोलन हुआ। डागर ने कहा कि जो पंचायत प्रस्ताव पास करेगी, उस गांव में शराब का ठेका नहीं खोला जाएगा।
बस, इसी बयान को आधार बनाकर उन पर आरोप लगाया गया कि उनके बयान से शराबबंदी आंदोलन को बढ़ावा मिला और उन्हें निलंबित कर दिया गया।
जनसत्ता में खबर प्रकाशित हुई कि भू-माफिया के मंसूबे पूरे न होने देने पर झज्जर के एस.डी.एम. फतेह सिंह डागर को निलंबित किया गया। इस खबर से सरकार की काफी बदनामी हुई।
डागर–ओझा मुलाकात
उस समय बी.एस. ओझा मुख्य सचिव थे। उन्होंने डागर को जनसत्ता की खबर दिखाते हुए पूछा कि यह क्या करवा दिया।
डागर ने जवाब दिया कि उनकी बंसल साहब से कोई बात नहीं हुई। इस पर ओझा ने कहा कि वह बंसल को जानते हैं, वह सच लिखता है।
कुछ दिनों बाद डागर को बहाल कर दिया गया।
स्पाइनलेस एचसीएस ऑफिसर्स एसोसिएशन
डागर के निलंबन का एचसीएस ऑफिसर्स एसोसिएशन ने कोई विरोध नहीं किया। मुख्यमंत्री को नाराज करने का जोखिम कोई नहीं लेना चाहता था।
सरकारी कार्रवाई
सुबह-सुबह भजन लाल के फोन आने पर डिप्टी कमिश्नर गुलाब सिंह और पुलिस अधीक्षक बलजीत संधू झज्जर पहुंचे और बुलडोजरों से जमीन पर बनाई गई चारदीवारी को गिरवा दिया।
