हरियाणा में जब खाकी को हुआ वेराग- हे री मेरा मन लागे है बाबा में

गुस्ताखी माफ़ हरियाणा — पवन कुमार बंसल

मेरी शीघ्र प्रकाशित होने वाली पुस्तक “खाकी के सबरंग किस्से” से साभार

जब खाकी को वैराग हुआ — मेरा मन लागे बाबा में
(भारती अरोड़ा, वी.एन. नेगी और आर.आर. सिंह)

हरियाणा की खाकी अक्सर चर्चा में रहती है। यहाँ एक से बढ़कर एक कलाकार, लेखक, कवि और समाजसेवी हुए हैं। गायक भी हैं, नामी खिलाड़ी भी, और खाकी से निकले नेता भी। यह भी सच है कि यहाँ खाकी को राजनीति का चस्का कुछ ज्यादा ही रहता है। हालांकि, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों में से कोई राजनीति के मैदान में विशेष सफलता नहीं पा सका, लेकिन मध्यम स्तर के कई पुलिसकर्मी विधायक बनने में सफल रहे।

भारती अरोड़ा
आईजी जैसे ऊँचे पद की सुदृढ़ नौकरी छोड़कर वे भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन हो गईं। आजकल वे वृंदावन के एक आश्रम में रहकर आध्यात्मिक जीवन व्यतीत कर रही हैं।

वी. एन. नेगी
जहाँ भारती अरोड़ा ने सेवानिवृत्ति के बाद सन्यास का मार्ग अपनाया, वहीं नेगी साहब ने भी रिटायरमेंट के पश्चात संन्यासी जीवन को चुन लिया। वर्तमान में वे हिमाचल प्रदेश में रहकर आध्यात्मिक साधना में लीन हैं।

आर. आर. सिंह
आर.आर. सिंह का व्यक्तित्व कुछ अलग ही रहा। वे स्वयं को भगवान शिव का अवतार और अपनी पत्नी को पार्वती का रूप मानते थे। वर्दी में रहते हुए गुरुग्राम में उनका दरबार सजता था, जहाँ पुलिस अधिकारियों की लंबी कतार आशीर्वाद लेने के लिए लगी रहती थी। वे सेवानिवृत्त एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस हैं और इन दिनों गौ-भक्ति में तल्लीन रहते हैं।

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