गुस्ताखी माफ़ हरियाणा – पवन कुमार बंसल
गरीब की जोरू सबकी भाभी — किसानों द्वारा शम्भु बॉर्डर पर हरियाणा सीआईडी के एक जवान को पकड़ना।
सुना है कि किसानों ने एक जवान को पकड़ लिया। बेचारा ड्यूटी पर था। क्या करे, अफसर का आदेश था, भाई नौकरी करनी है। वैसे हरियाणा सीआईडी अपने कारनामों से अक्सर सुर्खियों में रहती है।
करीब तैंतीस साल पहले हरियाणा सीआईडी के जवानों की वजह से कांग्रेस ने चंद्रशेखर की केंद्र सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। हरियाणा पुलिस पर मेरी शीघ्र आने वाली किताब “इनसाइड स्टोरी ऑफ हरियाणा पुलिस” में सीआईडी के रोचक किस्से होंगे।
थोड़ा पीछे चलें। पैंतालीस साल पहले भजन लाल ने विधायकों को खरीदकर तत्कालीन मुख्यमंत्री देवी लाल की सरकार तोड़ दी थी। भजन लाल विधायकों को लेकर भारत दर्शन पर चले गए और देवी लाल को पता ही नहीं लगा।
उन्होंने डीआईजी सीआईडी को डांट लगाई तो वे सक्रिय हुए, लेकिन कुछ पता नहीं चल रहा था। डीआईजी साहिब परेशान थे क्योंकि देवी लाल लगातार डांट लगा रहे थे। ऐसे में एक पत्रकार मित्र की मदद से पता चला कि काफिला राजस्थान गया है।
सीआईडी की कई गाड़ियां राजस्थान में फैल गईं। उन्हें हरियाणा से आती एक डिलक्स बस मिली, जिसमें भगाए हुए विधायक थे। सीआईडी इंस्पेक्टर खुश हुआ। बस के बाहर एक पर्दा लगा था, जिस पर लिखा था — “भजन वेड्स देवी”।
बस में खुर्शीद अहमद भी थे और वे गजब के witty थे। सीआईडी वाले उन्हें पहचानते थे। खुर्शीद अहमद भी कम नहीं थे। उन्होंने कंडक्टर को नीचे भेज दिया। कंडक्टर ने सीआईडी इंस्पेक्टर से कह दिया कि यह तो बारात जा रही है, भजन की देवी से शादी है। बेचारे सीआईडी वाले हाथ मलते रह गए।
तब उनमें एक वर्मा साहिब भी थे। वे चाय का भुगतान करने लगे तो होटल मालिक हाथ जोड़कर खड़ा हो गया कि मैं आपसे पैसे कैसे ले सकता हूँ। असल में उनकी मूंछें डाकू मोहर सिंह जैसी थीं।
जैसे “रेड एंड व्हाइट पीने वालों की बात ही और है” की तर्ज पर हरियाणा सीआईडी की बात कुछ और है।
दुमछल्ला — सीआईडी चीफ जे पी आत्रेय, हरीश कुमार और रेशम सिंह काफी कामयाब रहे। रेशम सिंह ने तो ओमप्रकाश चौटाला को कह दिया था कि नरवाना चुनाव में आपकी पोजीशन ठीक नहीं है क्योंकि जिनके पास आप जाते हैं, वे विवादास्पद हैं।
सीआईडी चीफ रहे के पी सिंह, शत्रुजीत कपूर और मोहिंदर मालिक डीजीपी भी बने।
सीआईडी चीफ को कई बार जहर भी पीना पड़ता है। चौटाला तो के पी सिंह से इतने नाराज हो गए कि कहने लगे, महकमा ही बंद कर दो।
आरक्षण आंदोलन के दौरान कपूर साहिब को मनोहर लाल खट्टर के लिए जहर का प्याला पीना पड़ा। अब आलोक मित्तल तो विज और मनोहर लाल की रस्साकशी में फंसे हैं। नूह हिंसा में भी उन्हें बॉस के लिए जहर पीना पड़ा।
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