हमसे भूल हो गई, हमको माफी दे दो

सिरसा (सी एम ग्रोवर प्रेसवार्ता) “तुम बिन यह दिल लगता नहीं,हम क्या करें”माना कि “हमसे भूल हो गई, हमको माफी दे दो” यह शब्दावली उन भाजपाई राजसी दिग्गजों पर खरा उतरती है, जिन्होंने विधानसभा चुनाव में भाजपा को अलविदा कह दिया, बगावत पर उतर कर चुनाव लडा और भाजपा प्रत्याशियों को चुनाव में सहयोग नहीं दिया। ऐसे राजसी चेहरे भाजपा में वापसी के लिए भटक रहे हैं, मगर भाजपा का शीर्ष नेतृत्व सुनने को तैयार नहीं नजर आ रहा। केवल इतना ही नहीं ऐसे भाजपाई दिग्गजों का निजी वोट बैंक धीरे धीरे खिसक रहा है।

कांग्रेस की संभावित सरकार का स्वप्न देखकर अपना पाला बदलने वाले स्वार्थी राजसी दिग्गजों को उस समय झटका लगा,जब हरियाणा के जागरूक मतदाताओं ने उनकी उम्मीदों पर ग्रहण लगा कर  भाजपा की विजयी हैट्रिक लगा दी। इससे इंकार नहीं किया जा सकता कि भाजपा ने अपनी दूसरी पारी में जजपा का साथ लेकर सरकार का गठन तो कर लिया,मगर मतदाताओं को निराश कर दिया, जिससे अछूता न रहने वाला भाजपाई संगठन भी हिचकोले खाने लगा। खुफिया सर्वे और संघ की रिपोर्ट से हाईकमान सतर्क हुआ और तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल की जगह नायब सैनी को कमान सौंपी। नेतृत्व परिवर्तन होते ही राजनीतिक बदलाव शुरू हो गया। भाजपा जजपा तालमेल की कार्यशैली से ख़फ़ा मतदाताओं को नायब सैनी की कार्यशैली ने प्रभावित किया,इसी के साथ ही भाजपा का खिसकते जनाधार पर अंकुश लगाने की कवायद शुरू हो गई।

आमजन को भी नायब सैनी की कार्यशैली ने प्रभावित किया, तो हरियाणवी मतदाताओं ने भाजपा पर अपना विश्वास बनाए रखते हुए स्पष्ट बहुमत से भाजपा सरकार की हैट्रिक बना दी। विधानसभा चुनाव दौरान भाजपा को अलविदा कहना, बगावत पर उतरना, भाजपा प्रत्याशियों को सहयोग न करने वाले भाजपाई,जो शीर्ष नेतृत्व के फोक्स पर आ गये थे,अब घर वापसी के लिए प्रयासरत नजर आ रहे हैं, उन्हें भाजपा के कार्यक्रमों में देखा जा सकता है। कांग्रेस सरकार का स्वप्न देखने वाले गौतम सरदाना, रणजीत चौटाला, शशिरंजन परमार,दवेंद्र कादियान,नयनपाल रावत, दीपक डागर, संदीप गर्ग, प्रिया असीजा,विशाल संतरी,बचन सिंह आर्य, जगबीर देसवाल,अनिल, राधा अहलावत, सतवीर सिंह, दिनेश कौशिक, विनोद, निर्मल आजाद, सत्यवान, लक्ष्मण नापा, दर्शन गिरी, सीमा गैबी, जयभगवान शर्मा,बिशंबर बाल्मीकि, शमशेर खटकडा, कर्णदेव कंबोज, राजवीर बराडा इत्यादि राजसी दिग्गज भाजपा में वापसी के लिए गोटियां फिट करने में बताए जा रहे हैं, मगर शीर्ष नेतृत्व इन्हें कोई तवज्जो देता नजर नहीं आ रहा।

इधर मुख्यमंत्री नायब सैनी की कार्यशैली का हरियाणवी मतदाताओं पर प्रभावी असर नजर आ रहा है, जिसकी पुष्टि कांग्रेस विधायक गोकुल सेतिया और शैली चौधरी का सार्वजनिक तौर पर नायब सैनी की तारीफ से होती है। नायब सैनी का आमजन पर सर चढ़कर बोल रहा जादू कांग्रेस को कभी भी “जोर का झटका धीरे से” दे सकता है, क्योंकि आपसे कलह से जूझ रही हरियाणा कांग्रेस दस माह होने पर भी अपना विपक्षी नेता का चयन नहीं कर पा रही।

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