Varanasi: करोड़ों की लागत, लेकिन व्यवस्था पर ताला! शोपीस बने आरआरसी सेंटर, जवाबदेही के घेरे में स्वच्छता अभियान
- पंकज झा, वाराणसी ब्यूरो
वाराणसी। गाजीपुर सेवराई केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूत बनाने और गांवों को स्वच्छ एवं प्रदूषणमुक्त बनाने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए आरआरसी (रिसोर्स रिकवरी सेंटर) आज अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रहे हैं। क्षेत्र के अधिकांश केंद्र या तो पूरी तरह बंद पड़े हैं या उन पर ताले लटक रहे हैं। नतीजा यह है कि जिन केंद्रों से कचरे का पृथक्करण, पुनर्चक्रण और वैज्ञानिक निस्तारण होना था, वे अब केवल शोपीस बनकर रह गए हैं।जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में करीब 80 प्रतिशत आरआरसी सेंटरों का संचालन आज तक नियमित रूप से शुरू नहीं हो सका है। कई स्थानों पर भवन पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन मशीनें निष्क्रिय पड़ी हैं और केंद्रों पर सन्नाटा पसरा रहता है। ऐसे में करोड़ों रुपये की सरकारी धनराशि खर्च होने के बावजूद योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि इन केंद्रों का नियमित संचालन सुनिश्चित किया जाए तो गांवों में फैले कचरे का बेहतर प्रबंधन होगा, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिल सकते हैं। लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता और संचालन व्यवस्था की कमी के कारण पूरी योजना अपने उद्देश्य से भटकती नजर आ रही है।
वहीं, संबंधित विभाग तकनीकी संसाधनों की कमी, प्रशिक्षित कर्मचारियों का अभाव और अन्य प्रशासनिक कारणों का हवाला देकर स्थिति स्पष्ट कर रहा है। हालांकि, सवाल यह उठ रहा है कि जब करोड़ों रुपये खर्च कर भवन और संसाधन तैयार किए गए, तो उनके संचालन की ठोस व्यवस्था पहले क्यों नहीं की गई?
ग्रामीणों ने मांग की है कि बंद पड़े आरआरसी सेंटरों को जल्द से जल्द चालू कराया जाए, ताकि स्वच्छ भारत मिशन और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की मंशा धरातल पर उतर सके। फिलहाल, करोड़ों की लागत से बने ये केंद्र विकास की उपलब्धि कम और व्यवस्था की लापरवाही की मिसाल अधिक दिखाई दे रहे हैं।
