- रिपोर्ट: सुकेश पांडेय
वाराणसी। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में अवैध पेड़ कटाई मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूले जाने और हर एक गिरे पेड़ के बदले 20 नए पेड़ लगाने का आदेश दिया है। साथ ही उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) को तीन महीने के भीतर जुर्माने की राशि का आकलन कर वसूली करने के निर्देश दिए गए हैं।
सोमवार को एनजीटी के चेयरपर्सन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव, न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए. सेथिंल वेल की पीठ ने यह आदेश सुनाया। याचिकाकर्ता सौरभ तिवारी ने मामले में पैरवी की।
बीएचयू ने दावा किया कि गिराए गए 12 पेड़ खतरनाक स्थिति में थे, लेकिन एनजीटी ने इस दलील को खारिज कर दिया। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि चंदन के पेड़ों की चोरी का मामला संदेहास्पद है।
अधिकरण ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय का पौधरोपण अभियान यह औचित्य नहीं देता कि वह पूरी तरह विकसित और स्वस्थ पेड़ों को अवैध रूप से काटे। इस फैसले के बाद बीएचयू प्रशासन पर पर्यावरणीय मानकों का पालन और वृक्ष संरक्षण को प्राथमिकता देने का दबाव बढ़ गया है।
