लखीसराय समाहरणालय में गूंजा ‘वन्दे मातरम्’, डीएम मिथिलेश मिश्र ने बताया राष्ट्रगीत का ऐतिहासिक महत्व

सरकारी सेवा यानी 'जनता की निष्ठा': डीएम ने Outcome Oriented Governance पर दिया बल

  • सरफराज आलम की रिपोर्ट

लखीसराय। समाहरणालय लखीसराय स्थित मंत्रणा कक्ष में जिला पदाधिकारी–सह–जिला निर्वाचन पदाधिकारी मिथिलेश मिश्र के नेतृत्व में “वन्दे मातरम्” का सामूहिक गायन किया गया। इस अवसर पर सभी जिला स्तरीय अधिकारी और कर्मी मौजूद रहे।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य सरकारी तंत्र में राष्ट्रीय चेतना, कर्तव्य बोध और संवैधानिक मर्यादाओं के अनुरूप व्यवहारिक अनुशासन को सशक्त करना था।

जिला पदाधिकारी मिथिलेश मिश्र ने इस मौके पर ‘वन्दे मातरम्’ के ऐतिहासिक महत्व और राष्ट्रीय अस्मिता में इसके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “वन्दे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा के प्रति मन, बुद्धि और कर्म की प्रतिज्ञा है।”

उन्होंने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में वन्दे मातरम् एक ऊर्जा, एक संगठन और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बनकर उभरा था। यह हर नागरिक को मातृभूमि के प्रति समर्पण, जनसेवा की निष्ठा और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देता है।

डीएम ने सभी अधिकारियों और कर्मियों से कहा कि सरकारी सेवा में कार्यरत प्रत्येक व्यक्ति जनता से किए गए वायदे, संवैधानिक दायित्व और कानून के शासन के प्रति पूर्ण निष्ठा रखें। उन्होंने Outcome Oriented Governance की अवधारणा पर बल देते हुए कहा कि शासन तंत्र का मुख्य उद्देश्य जनता को समय पर, पारदर्शी, त्वरित और न्यायपूर्ण सेवा प्रदान करना है।

जिला पदाधिकारी ने कहा — “वन्दे मातरम् केवल गीत नहीं, यह राष्ट्र के प्रति हमारी प्रतिज्ञा है, जिसे हमें प्रतिदिन अपने कार्य के व्यवहार में जीना है।”

कार्यक्रम में उप निर्वाचन पदाधिकारी सुश्री पम्मी रानी, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी रवि कुमार सहित सभी जिला स्तरीय अनुभागों के पदाधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

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