देहरादून, फरवरी 2026। उत्तराखण्ड मिडल स्कूल शिक्षा में एक नया दृष्टिकोण शामिल करने जा रहा है, जहाँ कम उम्र से ही छात्रों को वास्तविक दुनिया के कौशल प्रदान कर उनमें उद्यमिता की सोच विकसित की जाएगी। स्टेट काउन्सिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एससीईआरटी) ने 4000 से अधिक सरकारी स्कूलों में ‘कौशल बोध’ प्रोग्राम की शुरुआत के लिए उद्यम लर्निंग फाउंडेशन के साथ साझेदारी की है। इस पहल का लाभ राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप कक्षा 6 से 8 के छात्रों को मिलेगा।
इस पहल के साथ उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य बन गया है, जो सरकारी स्कूलों में कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों को फ्यूचर-रैडी स्किल्स और उद्यमिता की सोच विकसित करने का अवसर दे रहा है। मिडल स्कूल से शुरू होने वाला ‘कौशल बोध’ आगे चलकर ‘कौशलम’ प्रोग्राम के रूप में कक्षा 9 से 12 तक जारी रहता है, जिसका संचालन पहले से 2200 से अधिक स्कूलों में किया जा रहा है।
गतिविधि आधारित सीखने पर जोर
पीएसएससीआईवीई एवं एनसीईआरटी द्वारा विकसित एनसीएफ-एसई 2023 के सहयोग से तैयार ‘कौशल बोध’ कक्षा 6 से 8 के लिए गतिविधि आधारित कार्यक्रम है। इसमें लाइफ फॉर्म, मशीन एंड मटेरियल्स और ह्यूमन सर्विसेस जैसे क्षेत्रों के नौ मॉड्यूल शामिल हैं। छात्र टीम में काम करते हुए सरल उद्यम विकसित करते हैं और सीखते हैं कि उनके आइडिया को उत्पाद या सेवाओं में कैसे बदला जाए।
उद्यमिता की दिशा में ठोस परिणाम
कक्षा 11 के पाठ्यक्रम के अंतर्गत छात्रों ने 1500 से अधिक बिज़नेस आइडियाज़ पर काम किया, जिनमें से 350 से अधिक को जिला स्तरीय प्रदर्शनियों में प्रदर्शित किया गया। शीर्ष 47 आइडियाज़ राज्य स्तरीय प्रदर्शनियों तक पहुँचे। 10 से अधिक छात्रों ने अपने उद्यम शुरू कर आय अर्जित करना भी शुरू कर दिया है।
जीआईसी नथुवाला के छात्र ध्रुव ने Fabindia के साथ साझेदारी कर अपने डिज़ाइन किए परिधानों की आपूर्ति शुरू की है, जबकि जीआईसी बादवाला के समीर डेयरी उत्पाद तैयार कर स्थानीय बाज़ार में बेच रहे हैं।
शिक्षकों के प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान
इस साझेदारी के तहत एससीईआरटी उत्तराखण्ड और उद्यम लर्निंग फाउंडेशन शिक्षकों के प्रशिक्षण में भी सहयोग करेंगे। उद्देश्य यह है कि कक्षा में ऐसा वातावरण बनाया जाए, जहाँ छात्र प्रयोगात्मक तरीके से सीख सकें और निरंतर सुधार कर सकें।
उद्यम लर्निंग फाउंडेशन के सीईओ एवं सह-संस्थापक मेकिन माहेश्वरी ने कहा कि कक्षा 6 से 12 के बीच छात्रों में सोचने और निर्णय लेने की आदत विकसित होती है। यदि उन्हें समस्याओं को समझने और समाधान तलाशने के अवसर दिए जाएँ, तो वे आत्मविश्वास के साथ भविष्य की चुनौतियों का सामना कर सकते हैं।
एससीईआरटी उत्तराखण्ड के प्रोग्राम को-ऑर्डिनेटर सुनील भट्ट ने कहा कि यह पहल एनईपी 2020 के अनुरूप व्यावसायिक शिक्षा को मिडल स्कूल स्तर पर शामिल कर छात्रों को व्यवहारिक ज्ञान प्रदान करती है। वहीं डायरेक्टर (एकेडमिक, रिसर्च एंड ट्रेनिंग) बंदना गरब्याल ने इसे सरकारी स्कूलों में शिक्षा को अधिक प्रासंगिक, व्यवहारिक और फ्यूचर-रैडी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
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