UP Disaster Relief 2026: मौत पर अब 8 लाख रुपये मुआवजा, फसल नुकसान की सहायता भी बढ़ी

UP Disaster Relief 2026: योगी सरकार ने प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों, पशुपालकों और आम परिवारों के लिए सहायता राशि के नए मानक लागू किए। फसल क्षति पर 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ी मदद, मकान और सार्वजनिक सुविधाओं की मरम्मत के लिए भी तय हुई नई दरें।

UP Disaster Relief 2026: लखनऊ। उत्तर प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों को अब पहले के मुकाबले अधिक आर्थिक सहायता मिलेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार ने आपदा राहत के तहत मिलने वाले मुआवजे की दरों में बढ़ोतरी की है। इस फैसले के तहत प्राकृतिक आपदा में किसी व्यक्ति की मौत होने पर उसके परिवार को मिलने वाली सहायता राशि 4 लाख रुपये से बढ़ाकर 8 लाख रुपये कर दी गई है। इसके साथ ही फसल बर्बाद होने, पशुधन की क्षति, मकान के नुकसान और कृषि भूमि प्रभावित होने पर मिलने वाली मदद के मानकों में भी बदलाव किया गया है।

सरकार के नए प्रावधानों का लाभ प्रदेश के 10 लाख से अधिक किसानों तक पहुंचने की उम्मीद जताई गई है। राहत का दायरा केवल खेती तक सीमित नहीं रखा गया है। पशुपालकों, रेशम उत्पादन से जुड़े किसानों, मकान क्षति झेलने वाले परिवारों और आपदा में प्रभावित सार्वजनिक सुविधाओं को भी नई व्यवस्था में शामिल किया गया है। नए मानकों के अनुसार सहायता राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (NDRF) के प्रावधानों के तहत दी जाएगी।

UP Disaster Relief 2026: आपदा में मौत होने पर मुआवजा दोगुना

प्राकृतिक आपदा के कारण किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसके परिवार को अब 8 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी। इससे पहले यह राशि 4 लाख रुपये निर्धारित थी। सरकार ने इस सहायता को दोगुना कर दिया है। बाढ़, सूखा, अतिवृष्टि और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों को राहत देने के लिए यह बदलाव किया गया है।

आपदा के कारण परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु होने पर परिजनों के सामने आर्थिक और पारिवारिक चुनौतियां खड़ी हो जाती हैं। ऐसे समय में मिलने वाली सहायता राशि परिवार को तत्काल आर्थिक सहारा देने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण होती है। नए मानक के तहत सहायता राशि बढ़ने से प्रभावित परिवारों को पहले की तुलना में अधिक मदद मिल सकेगी। हालांकि, सहायता प्राप्त करने के लिए संबंधित मामले का निर्धारित नियमों के अनुसार पात्र होना जरूरी होगा।

UP Disaster Relief 2026: फसल नुकसान पर 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ी सहायता

प्राकृतिक आपदाओं का सीधा असर किसानों की फसलों पर पड़ता है। बाढ़, सूखा, अतिवृष्टि और दूसरी आपदाओं के कारण खेतों में खड़ी फसल बर्बाद होने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसे देखते हुए सरकार ने फसल क्षति पर मिलने वाली सहायता राशि में भी बढ़ोतरी की है।

नए मानकों के अनुसार सिंचित क्षेत्र में फसल नुकसान होने पर किसानों को अब 17 हजार रुपये के स्थान पर 22 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से सहायता मिलेगी। वहीं, वर्षा आधारित यानी असिंचित क्षेत्र में फसल बर्बाद होने पर सहायता राशि 8,500 रुपये से बढ़ाकर 11 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है।

बारहमासी फसलों और कृषि वानिकी को भी बढ़ी हुई सहायता के दायरे में रखा गया है। इन फसलों को नुकसान होने पर पहले 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की मदद मिलती थी। अब इसे बढ़ाकर 30 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर कर दिया गया है।

इन बदलावों से सिंचित, असिंचित और बारहमासी फसलों की खेती करने वाले किसानों को आपदा के बाद अधिक आर्थिक सहायता मिल सकेगी। खास बात यह है कि अलग-अलग प्रकार की खेती और नुकसान के आधार पर सहायता की दरें निर्धारित की गई हैं।

UP Disaster Relief 2026: रेशम उत्पादन करने वाले किसानों को भी मिलेगा लाभ

सरकार ने रेशम उत्पादन से जुड़े किसानों के लिए भी सहायता राशि बढ़ाई है। एरी, शहतूत और टसर रेशम उत्पादन में नुकसान होने पर पहले 6 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता दी जाती थी। अब इसे बढ़ाकर 7,800 रुपये प्रति हेक्टेयर कर दिया गया है।

मूगा रेशम उत्पादन में नुकसान होने पर सहायता राशि 7,500 रुपये से बढ़ाकर 9,800 रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है। इस बदलाव से रेशम उत्पादन करने वाले उन किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनका काम प्राकृतिक आपदा के कारण प्रभावित होता है।

कृषि भूमि को नुकसान पहुंचने पर भी सहायता के नए मानक तय किए गए हैं। खेतों में जमा गाद हटाने के लिए मिलने वाली मदद 18 हजार रुपये से बढ़ाकर 23 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है। वहीं, भूस्खलन और हिमस्खलन से जमीन को नुकसान पहुंचने पर सहायता राशि 47 हजार रुपये से बढ़ाकर 60 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर निर्धारित की गई है।

UP Disaster Relief 2026: गाय-भैंस की मौत पर 50 हजार रुपये की सहायता

प्राकृतिक आपदाओं में किसानों की फसलों के साथ पशुधन को भी नुकसान पहुंचता है। पशुपालन ग्रामीण परिवारों की आजीविका का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में पशुओं की मौत से परिवारों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। सरकार ने इस नुकसान की भरपाई के लिए पशुधन पर मिलने वाली सहायता राशि में भी बढ़ोतरी की है।

नए मानकों के अनुसार बड़े पशुओं की मौत होने पर अब 40 हजार रुपये के बजाय 50 हजार रुपये की सहायता मिलेगी। बकरी, भेड़ और सूअर जैसे छोटे पशुओं की मौत पर मिलने वाली सहायता 4 हजार रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये कर दी गई है।

घोड़े और खच्चर जैसे पशुओं की मौत पर अब 20 हजार रुपये के स्थान पर 25,400 रुपये की मदद मिलेगी। इस तरह पशुओं की अलग-अलग श्रेणियों के अनुसार सहायता राशि निर्धारित की गई है।

UP Disaster Relief 2026: मुर्गीपालकों को भी बढ़ा हुआ मुआवजा

आपदा से प्रभावित होने वाले पशुपालकों में मुर्गीपालन करने वाले लोग भी शामिल हैं। आंधी, बाढ़ और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं में मुर्गियों की मौत होने से छोटे कारोबारियों और ग्रामीण परिवारों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

नई व्यवस्था के तहत मुर्गी की मौत होने पर मिलने वाली सहायता राशि 100 रुपये से बढ़ाकर 130 रुपये प्रति मुर्गी कर दी गई है। इससे मुर्गीपालन से जुड़े प्रभावित लोगों को भी पहले की तुलना में अधिक सहायता मिल सकेगी।

सरकार की ओर से पशुधन और मुर्गीपालन के लिए सहायता राशि बढ़ाने का उद्देश्य आपदा से प्रभावित परिवारों की आजीविका को हुए नुकसान की भरपाई में मदद करना है।

UP Disaster Relief 2026: मकान क्षतिग्रस्त होने पर भी बढ़ी आर्थिक मदद

प्राकृतिक आपदा के दौरान मकानों को नुकसान पहुंचने पर प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता देने के लिए भी नए मानक तय किए गए हैं। बाढ़ और तेज बारिश जैसी परिस्थितियों में मकान पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। ऐसे परिवारों को राहत देने के लिए मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों के हिसाब से सहायता राशि निर्धारित की गई है।

नए प्रावधान के अनुसार मैदानी क्षेत्रों में मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने पर 1.85 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। पहाड़ी क्षेत्रों में पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकान के लिए यह राशि 2.06 लाख रुपये तय की गई है।

मैदानी क्षेत्रों में आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकान के लिए 93 हजार रुपये की सहायता का प्रावधान किया गया है। इससे आपदा के कारण घर को नुकसान झेलने वाले परिवारों को मरम्मत और पुनर्व्यवस्था में आर्थिक मदद मिल सकेगी।

UP Disaster Relief 2026: राहत शिविरों में 30 दिन तक मिलेगी सहायता 

आपदा के बाद कई बार प्रभावित परिवारों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों या राहत शिविरों में रहना पड़ता है। ऐसी स्थिति में भोजन, रहने और दूसरी जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था करना चुनौती बन जाता है। सरकार ने प्रभावित परिवारों को राहत शिविरों में 30 दिनों तक सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान किया है।

सूखे की स्थिति में पेयजल की समस्या से निपटने के लिए भी नई व्यवस्था की गई है। इसके तहत प्रभावित लोगों को 90 दिनों तक पेयजल सहायता देने का प्रावधान रखा गया है। इससे सूखा प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को लंबे समय तक पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।

UP Disaster Relief 2026: स्कूलों की मरम्मत के लिए 26 लाख रुपये तक की मदद

प्राकृतिक आपदाओं से केवल निजी संपत्तियों को ही नुकसान नहीं होता, बल्कि स्कूल, सड़क, अस्पताल और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। इन सुविधाओं को दोबारा उपयोग योग्य बनाने के लिए सरकार ने मरम्मत सहायता के नए मानक तय किए हैं।

प्राथमिक विद्यालयों की मरम्मत के लिए 15.50 लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान किया गया है। वहीं, माध्यमिक विद्यालयों, इंटर कॉलेज और पॉलिटेक्निक संस्थानों की मरम्मत के लिए 26 लाख रुपये तक की मदद मिल सकेगी।

इसके अलावा सड़कों, अस्पतालों और दूसरी सार्वजनिक सुविधाओं को हुए नुकसान की मरम्मत के लिए भी सहायता के मानक निर्धारित किए गए हैं। इससे आपदा के बाद आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं को फिर से शुरू करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

UP Disaster Relief 2026: 1 अप्रैल 2026 से हुए नुकसान पर भी लागू होंगे नए मानक

सरकार के फैसले की एक अहम बात यह है कि बढ़ी हुई सहायता राशि के नए मानक 1 अप्रैल 2026 से 4 नवंबर 2026 तक हुए नुकसान के मामलों पर भी लागू होंगे। इसका मतलब है कि इस अवधि के दौरान प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित पात्र लोगों को भी संशोधित दरों के अनुसार सहायता मिल सकेगी।

राहत राशि का भुगतान राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (NDRF) के प्रावधानों के तहत किया जाएगा। इसके लिए संबंधित नुकसान और पात्रता का आकलन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा।

UP Disaster Relief 2026: किसानों और आम परिवारों को मिलेगी राहत

योगी सरकार के इस फैसले में प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों की अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखा गया है। फसल नुकसान पर सहायता बढ़ाने के साथ पशुधन, मुर्गीपालन, रेशम उत्पादन, मकान और सार्वजनिक सुविधाओं को भी राहत के दायरे में रखा गया है।

सबसे बड़ा बदलाव आपदा में जनहानि होने पर मिलने वाली सहायता राशि में किया गया है, जिसे 4 लाख से बढ़ाकर 8 लाख रुपये कर दिया गया है। वहीं, किसानों को सिंचित और असिंचित भूमि पर फसल नुकसान के लिए बढ़ी हुई सहायता मिलेगी। पशुपालकों और मकान क्षति झेलने वाले परिवारों के लिए भी नई दरें निर्धारित की गई हैं।

इस फैसले से प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों, पशुपालकों और आम परिवारों को आर्थिक मदद मिलने का दायरा बढ़ेगा। हालांकि, वास्तविक सहायता संबंधित नुकसान के आकलन और निर्धारित पात्रता शर्तों के आधार पर दी जाएगी।

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