गुस्ताख़ी माफ हरियाणा- पवन कुमार बंसल
हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटें शीघ्र ही खाली होने जा रही हैं। ये सीटें किरण चौधरी और रामचंद्र जांगड़ा के कार्यकाल समाप्त होने के कारण रिक्त होंगी। ऐसे में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक और मीडिया गलियारों में एक बड़ा सवाल गूंज रहा है—क्या इस बार भी कांग्रेस के लिए कुख्यात रहा ‘इंकगेट’ दोहराया जाएगा?
राज्य की मौजूदा विधानसभा अंकगणित पर नजर डालें तो भाजपा एक सीट आसानी से जीतने की स्थिति में दिखाई देती है। वहीं यदि फ्लोर क्रॉसिंग और क्रॉस वोटिंग नहीं होती है, तो कांग्रेस के पास दूसरी सीट जीतने का मौका बन सकता है। हालांकि किरण चौधरी और रामचंद्र जांगड़ा की ओर से दोबारा प्रयास (लॉबिंग) की चर्चाएं भी चल रही हैं, लेकिन माना जा रहा है कि इस पर अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की जोड़ी ही करेगी।
दूसरी ओर कांग्रेस खेमे में इस समय जबरदस्त गहमागहमी देखने को मिल रही है। राज्यसभा का टिकट पार्टी के भीतर एक लॉटरी जैसे बंपर इनाम के तौर पर देखा जा रहा है, जिस कारण टिकट पाने की होड़ तेज है।
अब बात उस काले अध्याय की, जिसे हरियाणा की राजनीति में ‘इंकगेट’ के नाम से जाना जाता है। भ्रष्टाचार, दल-बदल, जातिवाद, भाई-भतीजावाद, भारत दर्शन और फ्लोर क्रॉसिंग के लिए पहले से बदनाम हरियाणा की राजनीति में करीब एक दशक पहले ‘इंकगेट’ जुड़ा था। उस समय राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के करीब एक दर्जन विधायकों के वोट रद्द कर दिए गए थे, क्योंकि उन्होंने विधानसभा सचिवालय द्वारा दिए गए पेन की बजाय अपने निजी पेन से हस्ताक्षर कर दिए थे।
इस घटनाक्रम का सीधा लाभ भाजपा को मिला और कांग्रेस प्रत्याशी आर.के. आनंद की हार हुई, जबकि भाजपा समर्थित उम्मीदवार और मीडिया बैरन सुभाष चंद्रा विजयी घोषित हुए। मामले में एफआईआर भी दर्ज हुई, लेकिन आज तक यह केस रहस्य ही बना हुआ है।
अब एक बार फिर राज्यसभा चुनाव सामने हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस पिछली गलतियों से सबक लेती है या हरियाणा की राजनीति में ‘इंकगेट’ का साया एक बार फिर लौटता है।
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