महान देशभक्त, क्रांतिकारी योद्धा शहीद उधम सिंह के 85वें शहीदी दिवस पर श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन

सिरसा, 31 जुलाई ( एम पी भार्गव): आजादी आंदोलन के महान देशभक्त, क्रांतिकारी योद्धा शहीद उधम सिंह के 85वें शहीदी दिवस पर उनकी याद में स्थानीय युवक साहित्य सदन में स्मृति सभा की और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। श्रद्धांजलि सभा में हिन्दी के महान साहित्यकार प्रेमचंद को भी उनकी 145 वीं जयंती पर याद किया गया।

31 जुलाई 1940 को इस वीर सपूत ने लंदन में हंसते-हंसते फांसी का बन्दा चूमा था। उन्होंने जलियांवाला बाग नरसंहार के गुनाहगार ब्रिटिश पंजाब के पूर्व उपराज्यपाल माईकल ओ डायर को 13 मार्च 1940 को लंदन के कैकस्टन हाल में पिस्तौल से गोलियां चलाकर उन्हीं की भाषा में उसे एक कड़ा सबक सिखाया था। दुनिया के आजादी पसंद लोगों ने उनकी तारीफ की थी।
फांसी से पहले “इंकलाब जिंदाबाद, साम्राज्यवाद मुर्दाबाद” के नारों के साथ इस वीर सपूत ने अंग्रेज साम्राज्यशाही के खात्मे का उद्घोष किया था। सात सालों के भीतर देश की जनता ने अंग्रेजों को उखाड़ फेंका।

शहीद उधमसिंह बचपन मे ही अनाथ हो गए थे। लेकिन उन्होंने बिना किसी शिक्षक के खुद को अपनी लगन, हिम्मत, मेहनत और संकल्प शक्ति से आजादी का क्रांतिकारी रास्ता चुना। इसी लक्ष्य को लेकर अफ्रीका, दक्षिणी व उत्तरी अमेरिका, यूरोप, सोवियत संघ तक दुनिया के कोने-कोने में गये।

सभी वक्ताओं ने कहा कि उधम सिंह सरीखे क्रांतिकारी यौद्धाओं को श्रद्धांजलि देने का एक सही तरीका यह है कि हम उनके जीवन संघर्षों से प्रेरणा लेकर उनके मूल्यबोधों, उनके चरित्र को धारण करें और आज की बदली हुई परिस्थितियों में वर्तमान पूंजीवादी शोषण, अन्याय, जात-पात, साम्प्रदायिकता, भाषाई व इलाकाई भेदभाव जैसी संकीर्णताओं से मुक्ति के लिए जन आंदोलनों में भागीदारी करें।

स्मृति सभा का संचालन शहीद भगतसिंह यादगार समिति के संयोजक मेहर सिंह बांगड़ ने किया और अध्यक्षता वीरेंद्र कुमार तंवर पूर्व कानूनगो ने की। मुख्य वक्ता किसान नेता सत्यवान के अलावा संजीव कुमार, विजय जाखड़, कुलदीप सिंह, शेर सिंह ने भी सभा को सम्बोधित किया ।

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