कृषि विभाग की कार्यवाही से व्यापारियों में रोष, मुख्यमंत्री योगी को सौंपा गया ज्ञापन
रामपुर के जिलाधिकारी को सौंपा गया ज्ञापन, लाइसेंस निलंबन व छापेमारी पर जताई आपत्ति
रामपुर, 28 जून। उत्तर प्रदेश में कृषि आदान व्यापारियों पर की जा रही विभागीय कार्यवाही के विरोध में व्यापारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित ज्ञापन रामपुर के जिलाधिकारी को सौंपा। व्यापारियों ने आरोप लगाया कि प्रदेश भर में खाद, बीज और कीटनाशक कारोबारियों को कृषि विभाग द्वारा छापे डालकर प्रताड़ित किया जा रहा है, जिससे उनमें भय का माहौल बना हुआ है और कई व्यापारी अपनी दुकानें बंद करने को मजबूर हैं।
ज्ञापन में व्यापारियों ने मुख्य रूप से दो प्रमुख मुद्दे उठाए—
1. यूरिया एवं अन्य खाद उत्पादों की आपूर्ति और कीमत में विसंगति:
व्यापारियों ने आरोप लगाया कि यूरिया होलसेल में ₹242 से ₹246 में बिल हो रहा है, लेकिन परिवहन भाड़ा केवल ₹4-5 दिया जा रहा है, जबकि वास्तविक भाड़ा ₹25-30 होता है। लोडिंग-अनलोडिंग के ₹10 अतिरिक्त लगते हैं। भारत सरकार के नियमों के अनुसार यह आपूर्ति F.O.R (डोर डिलीवरी) होनी चाहिए, परंतु कंपनियाँ इसका पालन नहीं कर रही हैं।
इसके साथ ही 30-40% टैगिंग उत्पाद जबरन थोपे जा रहे हैं, जो गोदामों में पड़े रह जाते हैं और व्यापारियों की लागत बढ़ा रहे हैं। ऐसे में सरकार द्वारा निर्धारित ₹266.50 में किसानों को यूरिया देना असंभव है। यही स्थिति DAP और NPK उर्वरकों में भी है।
2. कीटनाशकों की गुणवत्ता पर कार्रवाई:
व्यापारियों ने कहा कि कीटनाशक अधिनियम की धारा 30(3) के अनुसार यदि विक्रेता बिना छेड़छाड़ के कंपनी से माल लेकर बेचता है, तो उसकी जिम्मेदारी निर्माता कंपनी की होती है। इसके बावजूद विभाग विक्रेताओं के खिलाफ लाइसेंस निलंबन और मुकदमे दर्ज कर रहा है।
अन्य मांगें:
POS मशीन से बिक्री हो रही है तो सेल रजिस्टर और स्टॉक रजिस्टर की अनिवार्यता समाप्त की जाए।
बगैर लाइसेंस खाद बेचने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई हो।
व्यापारियों ने सरकार से आग्रह किया कि इस प्रकार की प्रताड़ना बंद की जाए और नीति में संशोधन कर व्यापारियों को राहत दी जाए, ताकि वे निष्पक्ष रूप से कृषि उत्पादों की आपूर्ति कर सकें।
