चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा की पूजा, जानें विधि, महत्व और मंत्र

नई दिल्ली: चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की जाती है। यह दिन शक्ति, साहस और शांति का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की उपासना से भय, बाधाएं और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं तथा जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

पूजा विधि:
नवरात्रि के तीसरे दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को शुद्ध करें। इसके बाद मां चंद्रघंटा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर गंगाजल छिड़कें। माता को पीले या सुनहरे रंग के वस्त्र अर्पित करें। फूल, धूप, दीप, अक्षत और पंचामृत से विधि-विधान के साथ पूजा करें। इसके बाद मां को दूध या दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाएं।

महत्व:
मां चंद्रघंटा को वीरता और करुणा का स्वरूप माना जाता है। उनके मस्तक पर अर्धचंद्र के आकार की घंटी सुशोभित रहती है, जिससे उनका नाम चंद्रघंटा पड़ा। उनकी पूजा से मन में शांति, आत्मविश्वास और साहस की वृद्धि होती है। साथ ही यह साधक को आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करती हैं।

मंत्र:
पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है—
“ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः।”

इसके अलावा भक्त मां के ध्यान मंत्र और आरती का भी पाठ करते हैं, जिससे विशेष कृपा प्राप्त होती है।

अन्य जानकारी:
इस दिन विशेष रूप से साधना और ध्यान करने का महत्व होता है। माना जाता है कि मां चंद्रघंटा अपने भक्तों को हर संकट से बचाती हैं और उन्हें शत्रुओं पर विजय दिलाती हैं। नवरात्रि के तीसरे दिन श्रद्धा और भक्ति से की गई पूजा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि लाती है।

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