मातृभाषा के प्रयोग में शर्म नहीं, गर्व होना चाहिए: विमलेन्दु

पटना: नेहरू युवा केन्द्र संगठन, बिहार के द्वारा आयोजित “अंतर राज्य युवा विनिमय कार्यक्रम 2024-25” में अतिथि राज्य, उत्तराखंड था और वहां से आए, विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत युवा और उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों के साथ “भाषा और संस्कृति का अंतर्संबंध” विषय पर प्रख्यात लेखक डॉ० कुमार विमलेन्दु सिंह ने बातचीत की। कुछ सुंदर भजन भी युवाओं ने, अपनी मातृभाषा में सुनाए। विमलेन्दु ने बताया कि भाषा परिश्रम के साथ ग्रहण की जानी चाहिए और अपनी मातृभाषा का प्रयोग बिना किसी झिझक के, बिना किसी शर्म के करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अंग्रेज़ी एक वैश्विक भाषा अवश्य है लेकिन इसे किसी की मेधा या प्रतिभा का मापदंड मान लेना ठीक नहीं है। उत्तराखंड से आए युवाओं को विमलेन्दु ने कुछ भोजपुरी गीत सुनाए और बताया कि जो प्रचलित गीत भोजपुरी में आप सुनते हैं, वह भोजपुरी की श्रेष्ठ रचनाएं नहीं हैं। युवाओं ने अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन करते हुए स्वरचित भजन भी गा कर सुनाया। भाषा के निरंतर संवर्धन के लिए जागरूक होना समय की मांग है। अभी के दौर में सिनेमा और मनोरंजन की अन्य विधाओं में भी भाषा का स्तर बहुत नीचे आ चुका है, ऐसे में स्वाध्याय और अभ्यास सबसे बड़े माध्यम हैं।

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