साहिबजादों की शहादत के नाम में संशोधन की मांग, “वीर बाल दिवस” की जगह “साहिबजादे शहादत दिवस” किया जाए
अमृतसर।सिख पंथ से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर अमृतसर में आयोजित एक अहम चर्चा के दौरान नेताओं ने केंद्र सरकार द्वारा साहिबजादों की शहादत के नाम पर “वीर बाल दिवस” नाम रखे जाने पर आपत्ति जताई। नेताओं का कहना था कि साहिबजादों की कुर्बानी केवल वीरता का प्रतीक नहीं, बल्कि धर्म, सिद्धांतों और मानव मूल्यों की रक्षा के लिए दी गई अद्वितीय शहादत है। ऐसे में इस दिवस का नाम “साहिबजादे शहादत दिवस” किया जाना अधिक उपयुक्त और भावनात्मक रूप से सही होगा।
नेताओं ने बताया कि इस मांग को लेकर केंद्र सरकार और हरियाणा सरकार से लगातार संपर्क किया जा रहा है। हरियाणा के मुख्यमंत्री सहित केंद्र के प्रतिनिधियों से इस विषय पर चर्चा हो चुकी है तथा प्रधानमंत्री से भी समय मांगा गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस ऐतिहासिक और संवेदनशील मुद्दे पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेगी।
चर्चा के दौरान शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया। नेताओं ने कहा कि एसजीपीसी सिखों की सर्वोच्च संस्था है, जिसे सिखों की संसद कहा जाता है और इससे ऊपर कोई संस्था नहीं है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि फेडरल सिस्टम के तहत हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का गठन पूरी तरह संवैधानिक और कानूनी है।
नेताओं ने बताया कि वर्ष 1966 में पंजाब के पुनर्गठन के बाद हरियाणा और दिल्ली अलग राज्य बने। इसी संवैधानिक प्रक्रिया के तहत हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का गठन हुआ, जिस पर उस समय के अकाली नेताओं और हरियाणा के प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर हैं। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने भी हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को मान्यता दी है। उन्होंने कहा कि इसे अलगाव के रूप में नहीं, बल्कि देश के फेडरल लोकतंत्र को मजबूत करने वाली व्यवस्था के रूप में देखा जाना चाहिए।
इस अवसर पर गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के मामलों पर भी गहरी चिंता व्यक्त की गई। नेताओं ने कहा कि बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि गुरजीत सिंह खालसा पिछले 14 महीनों से न्याय की मांग को लेकर तपस्या कर रहे हैं, लेकिन सरकार अब तक इस दिशा में ठोस कदम उठाने में विफल रही है।
अंत में संगत से अपील की गई कि 1 जनवरी को समाना से दरबार साहिब तक नगर कीर्तन निकाला जाएगा। नेताओं ने कहा कि यह नगर कीर्तन सिख–हिंदू एकता और भाईचारे का मजबूत संदेश देगा। उन्होंने दो टूक कहा कि गुरु ग्रंथ साहिब जी या किसी भी धार्मिक ग्रंथ की बेअदबी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी और इसके लिए सख्त से सख्त कानून बनाया जाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
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