रोहतक के तत्कालीन आईजी वाई. पुरन कुमार के वीआईपी गनमैन प्रकरण का अंत, लेकिन 50 करोड़ की डील का रहस्य अब भी बरकरार
गुस्ताख़ी माफ़ हरियाणा – पवन कुमार बंसल
हरियाणा की राजनीति और पुलिस महकमे को हिला देने वाला “मुंबई स्टाइल पॉटबॉयलर थ्रिलर” आखिरकार अपने एक अध्याय के अंत पर पहुंच गया है, लेकिन असली सवाल आज भी अनुत्तरित है—आखिर वह कौन था जिसने गैंगस्टर इंद्रजीत सिंह यादव का नाम एक हत्या के मामले से साफ कराने के लिए 50 करोड़ रुपये की मांग की थी?
इस पूरे घटनाक्रम के मुख्य किरदार रहे—रोहतक रेंज के तत्कालीन आईजी वाई. पुरन कुमार के वीआईपी गनमैन सुशील कुमार, शराब ठेकेदार बंसल, एएसआई संदीप लाठर, तत्कालीन डीजीपी शत्रुजीत सिंह कपूर, रोहतक के तत्कालीन एसपी नरेंद्र बिरजनिया और गैंगस्टर इंद्रजीत सिंह यादव।
घटनाक्रम की कड़ी
शराब ठेकेदार बंसल की शिकायत पर रोहतक पुलिस ने आईजी वाई. पुरन कुमार के वीआईपी गनमैन सुशील कुमार को गिरफ्तार किया। आरोप था कि पुरन कुमार की ओर से उसे कारोबार चलाने के एवज में पैसों की मांग की जा रही थी।
इसके ठीक अगले दिन चंडीगढ़ स्थित अपने आवास पर वाई. पुरन कुमार ने आत्महत्या कर ली। उन्होंने सुसाइड नोट में हरियाणा के कई सेवारत और सेवानिवृत्त आईएएस व आईपीएस अधिकारियों पर उत्पीड़न के आरोप लगाए।
चंडीगढ़ पुलिस ने मामला दर्ज किया। पुरन कुमार की पत्नी और आईएएस अधिकारी अमनित कौर ने आरोप लगाया कि उनके पति को आत्महत्या के लिए मजबूर किया गया और सुशील कुमार को तत्कालीन डीजीपी शत्रुजीत सिंह कपूर के इशारे पर फंसाया गया। उन्होंने अंतिम संस्कार से भी इनकार कर दिया, जिससे मामला राजनीतिक तूल पकड़ गया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हरियाणा दौरा तक स्थगित करना पड़ा।
इस बीच डीजीपी शत्रुजीत सिंह कपूर अवकाश पर चले गए और रोहतक एसपी नरेंद्र बिरजनिया को हटा दिया गया। मामले ने और गंभीर मोड़ तब लिया जब सुशील कुमार को गिरफ्तार करने वाले एएसआई संदीप लाठर ने भी आत्महत्या कर ली। अपने सुसाइड नोट में उन्होंने शराब ठेकेदारों से जुड़ी एक बड़े रिश्वत तंत्र का खुलासा किया।
तत्कालीन मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने संदीप लाठर की विधवा को सरकारी नौकरी और एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की, जिसे बाद में पूरा किया गया।
समय बीतने के साथ घटनाक्रम ने नया मोड़ लिया—नरेंद्र बिरजनिया को एसपी करनाल बना दिया गया और शत्रुजीत सिंह कपूर को आईटीबीपी का महानिदेशक नियुक्त कर दिया गया। चंडीगढ़ पुलिस ने इस मामले में हरियाणा के कई सेवारत और सेवानिवृत्त आईएएस-आईपीएस अधिकारियों से पूछताछ भी की।
चार्जशीट समय पर दाखिल न होने के कारण सुशील कुमार को जमानत मिल गई। उसे रोहतक के पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में कमरा आवंटित किया गया और वह कथित तौर पर आईजी कार्यालय से ही गतिविधियां संचालित करता रहा।
अब भी कायम रहस्य
पूरे मामले में सबसे बड़ा रहस्य गैंगस्टर इंद्रजीत सिंह यादव की भूमिका को लेकर है। आरोप है कि एक हत्या के मामले से उसका नाम हटवाने के लिए 50 करोड़ रुपये की मांग की गई थी। फिलहाल इंद्रजीत यादव दुबई में बताया जा रहा है। यदि उससे पूछताछ हो पाती है, तो पुलिस और राजनीति के शीर्ष स्तर तक फैले इस काले सच से पर्दा उठ सकता है।
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