“स्वावलम्बन की सुई से संवरती नारी सशक्तिकरण की डोर”

  • रिपोर्ट – मनोज कुमार यादव

एटा:- केनरा बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान,एटा में सिलाई एवं कढ़ाई का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं ने अपने बैच के अंतिम दिवस पर परंपरा और प्रगति का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। संस्थान परिसर में रंगोली बनाकर एवं दीप प्रज्ज्वलन कर उन्होंने दीपावली पर्व को केवल उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की ज्योति के प्रतीक के रूप में मनाया।

आज ग्रामीण भारत की नारी मात्र गृहिणी नहीं, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण की धुरी बनती जा रही है। प्रशिक्षण के माध्यम से इन महिलाओं ने न केवल सूई-धागे का कौशल अर्जित किया, बल्कि आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की नवीन परिभाषा भी गढ़ी। जहां एक ओर उनके हाथ कला-कौशल की निपुणता में रत थे, वहीं दूसरी ओर उनके मन में उज्जवल भविष्य की दीपशिखा प्रज्वलित थी।

केनरा बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान, एटा जैसे केंद्र ग्रामीण स्त्रियों को वह मंच प्रदान कर रहे हैं, जहां हुनर रोजगार में परिवर्तित होता है और परंपरा प्रगतिशीलता का रूप धारण करती है। इन प्रशिक्षणार्थियों द्वारा बनाई गई रंगोलियाँ केवल सौंदर्य का प्रतीक नहीं थीं, बल्कि उनकी रचनात्मकता, अनुशासन और सशक्त मनोबल की प्रतीक अभिव्यक्ति थीं। दीपों की लौ के साथ उन्होंने यह संदेश दिया कि “अंधकार चाहे कितना भी गहन क्यों न हो, यदि नारी शिक्षित, कुशल और स्वावलंबी हो तो समाज का भविष्य सदैव प्रकाशित रहेगा।”

ऐसे प्रयासों से यह स्पष्ट होता है कि ग्रामीण परिवेश में छिपी प्रतिभाएं यदि सही मार्गदर्शन और अवसर प्राप्त करें तो वे आर्थिक प्रगति की सशक्त वाहक बन सकती हैं। इन महिलाओं ने सिद्ध कर दिया कि स्वावलम्बन का प्रकाश किसी दीये का मोहताज नहीं, बल्कि मेहनत, कौशल और आत्मविश्वास की ज्वाला से स्वयं उत्पन्न होता है।

अतः यह दृश्य केवल प्रशिक्षण का समापन नहीं था, बल्कि एक नई यात्रा का आरंभ था — उस यात्रा का, जो ग्राम्य अर्थव्यवस्था में नारी की सक्रिय भागीदारी को नई दिशा और दृष्टि प्रदान करेगी।

संस्थान के निदेशक श्री ओम बिभू ने सभी प्रशिक्षणार्थियों को उनके उज्जवल भविष्य की और दीपावली की शुभकामनाएं दीं।

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