अशोकधाम में चल रही नौ दिवसीय “मानस श्रृंगी ऋषि कथा” के तीसरे दिन का आयोजन भावपूर्ण आध्यात्मिक माहौल में हुआ सम्पन्न
अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक मोरारजी बापू ने कहा,दुख रूपी अंधकार के बाद प्रकाश का आगमन निश्चित
लखीसराय(सरफराज आलम)लखीसराय के अशोकधाम में चल रही नौ दिवसीय “मानस श्रृंगी ऋषि कथा” के तीसरे दिन का आयोजन भावपूर्ण आध्यात्मिक माहौल में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में परम पूज्य श्री मोरारजी बापू का संदेश “अंधकार कोई शाप नहीं, वही सृष्टि का मुख्य द्वार है” पूरे परिसर में गूंजता रहा।लखीसराय की पुण्यभूमि अशोकधाम में स्वांतः सुखाय नौ दिवसीय “मानस श्रृंगी ऋषि कथा” का आयोजन किया जा रहा है।
तीसरे दिन की कथा की शुरुआत पूज्य बापू ने लोककल्याण के लिए वैदिक मंत्र “श्रवणात, ममनात, ध्यानात…” के सामूहिक पाठ से करवाई, जिसमें हजारों श्रद्धालु एक स्वर में मंत्रोच्चार करते दिखे।व्यासपीठ से पूज्य बापू ने कहा कि अशोकधाम की यह भूमि अनेक प्रकार की चेतनाओं से परिपूर्ण है और इस नौ दिवसीय कथा का केंद्र बिंदु मानस श्रृंगी ऋषि हैं।
बापू ने प्रकट और अप्रकट सभी चेतनाओं को नमन करते हुए विद्वतजनों, विभिन्न क्षेत्रों से आए अतिथियों, मनोरथी परिवारों और सभी श्रोताओं का प्रणाम के साथ स्वागत किया।कथा के क्रम में बापू ने दूसरे दिन की संध्या के प्रसंग को याद करते हुए कबीरदास के दोहों के प्रति अपना गहरा प्रेम साझा किया।
उन्होंने एक भक्त की चिट्ठी का उल्लेख किया, जिसमें 15 वर्षों से कथा सुनने के बाद भी उसके फल को लेकर प्रश्न था, जिस पर बापू ने “जो दायक फल चारि” समझाते हुए बताया कि कथा से धार्मिक पहचान मिलती है,जीवन का अर्थ स्पष्ट होता है, कामनाएं या तो पूरी हो जाती हैं या स्वतः शांत हो जाती हैं और अंततः यही कथा मनुष्य को मुक्ति की ओर ले जाती है।सुख-दुख के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पूज्य बापू ने कहा कि अंधकार कोई शाप नहीं, बल्कि सृष्टि का मुख्य द्वार है और संसार की अधिकांश महान घटनाएं अंधकार से ही जन्म लेती हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि गर्भ के अंधकार से शिशु का जन्म होता है और भगवान श्रीकृष्ण का अवतार भी अंधेरी कारागार में हुआ, जो यह संदेश देता है कि दुख रूपी अंधकार के बाद प्रकाश का आगमन निश्चित है।कथा ने उपस्थित श्रद्धालुओं को धैर्य, विश्वास और आत्मचिंतन का संदेश दिया, जिसमें जीवन के उतार-चढ़ाव को ईश्वरीय लीला मानते हुए सहजता से स्वीकार करने की प्रेरणा दी गई।
पूरे दिन अशोकधाम परिसर में भक्ति, मंत्रोच्चार और कथा श्रवण की गूंज के बीच श्रद्धालु आध्यात्मिक समाधान और आंतरिक शांति का अनुभव करते दिखाई दिए।लखीसराय के अशोकधाम में चल रही नौ दिवसीय “मानस श्रृंगी ऋषि कथा” के तीसरे दिन का आयोजन भावपूर्ण आध्यात्मिक माहौल में सम्पन्न हुआ। लखीसराय की पुण्यभूमि अशोकधाम में स्वांतः सुखाय नौ दिवसीय “मानस श्रृंगी ऋषि कथा” का आयोजन किया जा रहा है।
तीसरे दिन की कथा की शुरुआत परम पूज्य बापू ने लोककल्याण के लिए वैदिक मंत्र “श्रवणात, ममनात, ध्यानात…” के सामूहिक पाठ से करवाई, जिसमें हजारों श्रद्धालु एक स्वर में मंत्रोच्चार करते दिखे।व्यासपीठ से पूज्य बापू ने कहा कि अशोकधाम की यह भूमि अनेक प्रकार की चेतनाओं से परिपूर्ण है और इस नौ दिवसीय कथा का केंद्र बिंदु मानस श्रृंगी ऋषि हैं।
