एलोवेरा की खेती से ₹3.5 करोड़ों कमाने वाले किसान की कहानी..

सतारा : महाराष्ट्र के सतारा जिले के पदली गांव के रहने वाले हृषिकेश जयसिंग धाणे ने एलोवेरा की खेती से एक मिसाल कायम की है। सिर्फ दो एकड़ जमीन पर खेती करके वे सालाना लगभग 8,000 लीटर एलोवेरा जूस का उत्पादन करते हैं और उनका वार्षिक कारोबार ₹3.5 करोड़ तक पहुँच गया है।

🌿 शुरुआत और प्रेरणा

हृषिकेश जयसिंग धाणे ने कृषि स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद पारंपरिक फसलों से हटकर कुछ नया करने का मन बनाया। सतारा जिले में बढ़ती गर्मी और पानी की कमी ने कई किसानों की फसलों को प्रभावित किया था। इस चुनौती को अवसर में बदलते हुए, हृषिकेश ने एलोवेरा की खेती को चुना, क्योंकि यह पौधा कम पानी में भी अच्छी उपज देता है और इसकी बाजार में मांग निरंतर बढ़ रही थी।

🧴 उत्पाद और प्रोसेसिंग
केवल खेती तक सीमित न रहते हुए, हृषिकेश ने अपने उत्पादों के प्रसंस्करण पर भी ध्यान दिया। उन्होंने एक छोटी प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की, जहाँ एलोवेरा जूस के साथ-साथ साबुन, शैम्पू और जैविक कीटनाशक भी बनाए जाते हैं। इस यूनिट में उन्नत तकनीक और उच्च गुणवत्ता वाले मानकों का पालन हो रहा है, जिससे उनके उत्पाद बाज़ार में उच्च लोकप्रियता प्राप्त कर रहे हैं।

💼 व्यवसायिक सफलता
आज हृषिकेश की कंपनी महाराष्ट्र के साथ-साथ दिल्ली, मुंबई, पुणे और बंगलौर तक अपने उत्पाद पहुंचा रही है। मात्र दो एकड़ में शुरू हुआ यह व्यवसाय अब सालाना ₹3.5 करोड़ से अधिक का कारोबार कर रहा है। ग्रामीण युवाओं के लिए यह कहानी आत्मनिर्भरता का उदाहरण बन गई है।

📈 प्रेरणा और मार्गदर्शन
हृषिकेश की सफलता ने साबित कर दिया है कि यदि सही योजना, मेहनत और नवाचार से काम किया जाए तो ग्रामीण किसानों की आय दोगुनी-तिगुनी हो सकती है। उन्होंने नए किसानों को नियमित ट्रेनिंग और मार्गदर्शन भी प्रदान करना शुरू कर दिया है, ताकि वे भी पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर एलोवेरा जैसे लाभकारी पौधों की खेती अपना सकें।

हृषिकेश जयसिंग धाणे की कहानी हमें यह सिखाती है कि चुनौतियाँ अवसर बन सकती हैं—बशर्ते हम उनमें सकारात्मक सोच और नवीनता लाएँ।

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