रामलीला का क्रम निरंतर जारी, आज की लीला में हनुमानजी ने माता जानकी को खोजकर रावण की लंका को जला डाला

मंगलवार के दिन को लेकर श्री हनुमान जी की विशाल आरती का कार्यक्रम भी हुआ जबरदस्त ,खूब बटोरी तालियां

ऐलनाबाद, 1 अक्टूबर( डॉ एम ,पी, भार्गव )। शहर के श्री गौशाला मार्ग पर श्री रामलीला कमेटी के बैनर तले वृंदावन से आये कलाकारों की भव्य श्रीरामलीला आठवें दिन भी जारी रही। मध्यरात्रि तक चली श्री रामलीला को देखने सैंकडो महिला पुरुष दर्शक पहुंच रहे है। आठवें दिन की श्रीरामलीला के प्रारंभ में जिंदाराम एक्सपोर्ट्स के एमडी व स्थानीय समाजसेवी दीपक गोयल ने वीर बजरंगबली और पवित्र रामायण की आरती की। श्रीरामलीला कमेटी के प्रधान सज्जन गोयल व  कार्यकारिणी के सभी सदस्यों ने मुख्यातिथि को माला व श्रीरामनाम का पटका पहनाकर स्वागत किया। श्रीरामलीला के प्रारंभ में श्रीराम और लक्ष्मण बड़े दुःखी मन से घने जंगलों में जानकी की खोज में भटक रहे है। तभी ऋषिमुख पर्वत पर उनकी मुलाकात ब्राह्मण वेषधारी हनुमानजी से होती है। हनुमानजी अपने प्रभु श्रीराम को पाकर बहुत खुश होते है। वे श्रीराम लक्ष्मण को अपने वानरराज सुग्रीव से मिलाने ले जाते है। श्रीराम और सुग्रीव में दोस्ती हो जाती है। श्रीराम अपने मित्र सुग्रीव को अपनी सारी कहानी सुनाते है जिस पर सुग्रीव श्रीराम को जानकी की खोज कराने में  सहायता देने का वचन देते है। सुग्रीव भी श्रीराम को अपने भाई किष्किंधा के राजा बाली द्वारा उसके राज्य और उसकी पत्नी को जबरदस्ती छीन लेने की बात कहकर श्रीराम से सहायता मांगते है। जिस पर श्रीराम सुग्रीव को सहायता देने का वचन देकर उसे अपने बड़े भाई बाली को युद्ध के लिए ललकारने भेजते है। बाली और सुग्रीव के दो बार के सीधे युद्ध मे बाली सुग्रीव पर भारी पड़ता है। तब श्रीराम एक पेड़ की आड़ लेकर तीर चलाते है जिससे बाली मारा जाता है। लेकिन मरने से पहले बाली अपने पुत्र अंगद को श्रीराम को सौंप जाता है। श्रीराम सुग्रीव को किष्किंधा का राजा और अंगद को वहां का राजकुमार बना देते है। वर्षा ऋतु बीतने पर श्रीराम अपने भाई लक्ष्मण को भेजकर सुग्रीव को बुलाते है और जानकी की खोज शुरू करवाने को कहते है। सुग्रीव अपने सभी महारथियों हनुमान जी, अंगद, नल, नील, जामवंत और अन्य वानर-भालू योद्धाओं के साथ विचार विमर्श कर रणनीति बनाते है और अलग अलग योद्धाओं को अलग अलग दिशाओं में जानकी की खोज में भेज देते है। दक्षिण दिशा में विशाल समुद्र को लांघकर लंका में जाने के लिए हनुमानजी को चुना जाता है।

उन्हें उनका बल याद दिलाया जाता है। जिस पर हनुमानजी सहर्ष लंका जाने के लिए चल पड़ते है। रास्ते मे कई बाधाओं को पार कर वे लंका नगरी में प्रवेश कर जाते है। इधर, लंका नगरी की अशोक वाटिका में लंकापति रावण की कैद में जानकी श्रीराम की याद में बहुत उदास बैठी है। उसे चारो तरफ से खतरनाक राक्षसियों ने घेर रखा है। तभी वहां लंकापति रावण स्वयं आ जाता है। वह अपने साथ विवाह करने के लिए जानकी को खूब मनाता व प्रलोभन भी देता है लेकिन जानकी उसकी एक नही सुनती और उसे सिरे से दुत्कार देती है। गुस्से में आया रावण वहां मौजूद राक्षसियों को जानकी को खूब सताने व डराने का आदेश देकर चला जाता है। तब वहां हनुमानजी जानकी के सामने प्रकट होकर उन्हें अपना परिचय देते है उन्हें श्रीराम की निशानी मुद्रिका सौंपते है। वे जानकी को बहुत सांत्वना देते है। जिस पर जानकी खुश होकर हनुमानजी को आशीर्वाद देती है। भूख लगने पर हनुमानजी अशोक वाटिका में लगे फल खाने लगते है तभी वहां रावण का पुत्र अक्षय कुमार आकर हनुमानजी को ललकारता है। दोनो के बीच युद्ध होता है जिसमे अक्षय कुमार मारा जाता है। जब यह खबर रावण तक पहुंचती है तो वह गुस्से में तिलमिला जाता है। वह अपने पुत्र मेघनाद को हनुमानजी को पकड़कर लाने का आदेश देता है। मेघनाद हनुमानजी को युद्ध मे नही हरा पाया तो वह ब्रह्मपाश का प्रयोग करके हनुमानजी को बंदी बना लेता है और फिर हनुमानजी को रावण के दरबार मे पेश करता है। हनुमानजी जी रावण को समझाते है कि अभी कुछ नही बिगड़ा, श्रीराम से माफी मांगकर उनकी धर्मपत्नी जानकी को सकुशल वापस लौटाने की सलाह देते है लेकिन घमंडी रावण हनुमानजी की बात को मानने की बजाय हनुमानजी की हत्या करने का आदेश देता है। लेकिन विभीषण की सलाह पर लंकापति रावण हनुमानजी की हत्या करवाने की बजाय उनकी पूंछ में आग लगवा देता है। हनुमानजी जी घूम-घूम पर पूरी लंका नगरी में आग लगा देते है जिससे रावण की सोने की लंका नगरी धू-धू कर जल उठती है। पूरी लंका नगरी में चारो तरफ चीख-पुकार मच जाती है। यहां से हनुमानजी जयश्रीराम के जयघोष के साथ ही लंका नगरी से वापस श्रीरामादल की ओर चल पड़ते है। दर्शकों ने तालियां बजाकर श्री रामलीला के कलाकारों के अभिनय को खूब सराहा। इस अवसर पर श्रीरामलीला कमेटी के अध्यक्ष सज्जन गोयल, उपाध्यक्ष ओपी पारीक व राधाकृष्ण पटीर, कोषाध्यक्ष व सचिव राजेश वर्मा, सह सचिव प्रवीण फुटेला, प्रेस प्रवक्ता सुभाष चौहान, आदि उपस्थित थे

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