ऐलनाबाद,07 मई ( एम पी भार्गव) खंड के ग्राम उमेदपुरा में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर कथा व्यास श्री श्री 108 महंत श्री भरतमुनि जी महाराज ने विभिन्न दिव्य एवं प्रेरणादायक प्रसंगों का अत्यंत भावपूर्ण, सरस एवं विस्तृत वर्णन किया। कथा का शुभारंभ भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति से किया गया, जिसमें बताया गया कि विपरीत परिस्थितियों में भी जिसने भगवान पर पूर्ण विश्वास रखा, उसकी रक्षा स्वयं भगवान करते हैं। हिरण्यकश्यप जैसे अत्याचारी पिता के सामने भी प्रह्लाद की अडिग श्रद्धा ने यह संदेश दिया कि सच्ची भक्ति में अपार शक्ति होती है।
इसके पश्चात गजेंद्र मोक्ष का प्रसंग सुनाते हुए गुरुदेव ने बताया कि जब जीव पूरी तरह से भगवान की शरण में चला जाता है, तब भगवान स्वयं उसकी रक्षा के लिए तत्पर हो जाते हैं। यह कथा शरणागति और ईश्वर की कृपा का जीवंत उदाहरण है।
आगे वामन अवतार की कथा में भगवान के दिव्य स्वरूप और दानवीर राजा बलि के त्याग, समर्पण और धर्मपालन का सुंदर वर्णन किया गया। गुरुदेव ने बताया कि भगवान अपने भक्तों की परीक्षा लेकर उन्हें और महान बनाते हैं। इसके साथ ही समुद्र मंथन का अद्भुत प्रसंग सुनाया गया, जिसमें देवताओं और असुरों द्वारा मिलकर किए गए मंथन से निकले चौदह रत्नों, अमृत और विष की कथा का विस्तार से वर्णन किया गया। इस प्रसंग के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जीवन में संघर्ष के बाद ही अमृत रूपी सफलता प्राप्त होती है।
कथा के अगले क्रम में श्रीराम अवतार का वर्णन करते हुए मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, सत्य, धर्म और कर्तव्य पालन की महिमा बताई गई। गुरुदेव ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन हमें आदर्श आचरण और समाज में मर्यादा बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
कथा के समापन अवसर पर श्रीकृष्ण जन्मोत्सव बड़े ही हर्षोल्लास, श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के प्रकट होने का पावन क्षण आया, पूरा पंडाल “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से गूंज उठा। महाराज जी के शिष्य रामनिवास रसिया के भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। जन्मोत्सव के दौरान सुंदर झांकी सजाई गई तथा प्रसाद वितरण भी किया गया।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और सभी ने भाव-विभोर होकर कथा का श्रवण किया तथा धर्म लाभ प्राप्त किया। आयोजक कड़वासरा परिवार द्वारा सभी आगंतुकों के लिए उत्तम व्यवस्थाएं की गईं, जिससे कार्यक्रम सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।
