“डिजिटल इंडिया चलाने वाले ही असुरक्षित CSC/VLE शोषण पर पीएम–सीएम तक पहुँची निर्वाण फाउंडेशन”

  • रिपोर्ट: जितेंद्र कुमार

मोदीनगर/गाजियाबाद।देश में डिजिटल इंडिया अभियान को जमीनी स्तर पर सफल बनाने वाले CSC/VLE/जनसेवा केंद्र संचालक आज स्वयं असुरक्षा और उपेक्षा का शिकार हैं। न्यूनतम मानदेय, बीमा और सामाजिक सुरक्षा के अभाव में काम कर रहे इन डिजिटल श्रमिकों के शोषण का मुद्दा अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुँच गया है। इस संबंध में निर्वाण फाउंडेशन ने केंद्र व राज्य सरकार के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।

फाउंडेशन द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतें सरकारी रिकॉर्ड में शामिल हैं, जिनमें केंद्र सरकार से संबंधित MINIT/E/2025/0009030, MOIAB/E/2025/0002630 तथा उत्तर प्रदेश सरकार से संबंधित GOVUP/E/2025/0145302 शिकायत संख्या प्रमुख हैं।

निर्वाण फाउंडेशन का कहना है कि किसान सम्मान निधि, पेंशन, छात्रवृत्ति, आवास योजना, उज्ज्वला योजना और विश्वकर्मा योजना जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन CSC/VLE के बिना संभव नहीं है। इसके बावजूद इन संचालकों को न तो न्यूनतम मानदेय दिया जा रहा है और न ही कोई सामाजिक सुरक्षा, जो डिजिटल इंडिया की आत्मा कहे जाने वाले श्रमिकों के साथ गंभीर अन्याय है।

फाउंडेशन ने सरकार से मांग की है कि CSC/VLE संचालकों को प्रतिदिन ₹1000 न्यूनतम मानदेय, आयुष्मान/हेल्थ कार्ड, PF–ESIC की सुविधा, परिवार सहित जीवन बीमा, तकनीकी सहायता तथा नियमित प्रशिक्षण नीति तत्काल लागू की जाए।

निर्वाण फाउंडेशन ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि CSC/VLE संचालकों को उनके अधिकार और सम्मान नहीं मिला, तो इस मुद्दे को सड़क से लेकर संसद तक उठाया जाएगा।

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