आम आदमी पार्टी के स्थानीय नेता ने एक हालिया बयान में नगर पालिका अध्यक्षा सना खानम के खिलाफ अपना गुस्सा जताते हुए कहा— > “हमें अफ़सोस है कि हम रामपुर को अच्छा चेयरमैन नहीं दे पाए। चेयरमैन भाजपा के इशारे पर काम कर रही हैं। ज्वालानगर साफ है लेकिन बाकी शहर पानी में डूबा हुआ है। नगर पालिका में भ्रष्टाचार चरम पर है। तीन साल से हर बारिश में शहर डूब रहा है। सैकड़ों दुकानें तोड़कर लोगों को बेरोजगारी दी गई और हाउस टैक्स आधा करने की बजाय सौ गुना बढ़ा दिया गया। हम अपनी ग़लती मानते हैं और रामपुर की आवाम से माफ़ी मांगते हैं।”
लेकिन नेता जी को याद होना चाहिए कि सना खानम के कुर्सी संभालने के कुछ ही दिनों बाद पड़ी पहली बारिश ने ही शहरवासियों के घरों में तबाही का पैगाम भेज दिया था। विगत तीन वर्षों में हालात और भी बदतर हुए — गलियाँ कीचड़ में, मोहल्ले गटर में, और घरों में घुटनों तक पानी। लेकिन तब आप के नेता नदारद थे।
नगर पालिका द्वारा दुकानें तोड़कर सैकड़ों परिवारों को सड़क पर खड़ा कर दिया गया। हाउस टैक्स की वसूली में दमनकारी रवैया अपनाकर छोटे व्यापारियों और भवन स्वामियों की कमर तोड़ दी गई। पर यह दुर्भाग्य ही है कि तब आम आदमी पार्टी नेता ने रस्म अदायगी से आगे कुछ नहीं किया। नतीजा यह कि दुकानें बनाकर देने के आश्वासन के बीच दुकानें टूटती रही दुकानदारों को बेरोजगार बनाकर दोराहे पर खड़ा किया जाता रहा।
अब जब शहर की हर गली, हर मोहल्ला, हर चौबारा और सोशल मीडिया तक पर सना मामून और उनके तथाकथित समाजसेवी पति मामून शाह खां के खिलाफ़ आवाज़ें बुलंद हो रही हैं। ऐसे में केजरीवाल के दिल्ली दरबार में रामपुर पालिकाध्यक्ष सीट जिताने का दंभ भरने वाले आप नेता पालिकाध्यक्ष पर अपनी कमजोर होती राजनीतिक पकड़ को मजबूत करने की कौशिश करने के फेर में नौटंकी करते दिखाई दे रहे हैं।
आप नेता को मालूम होना चाहिए कि “रंगे सियार को शेर बताकर वोट मांगने वालों के चेहरे जनता पहचान चुकी है”। शहरी आवाम अब चेहरों के पीछे छुपे नकाब देखना सीख चुकी है। उन्हें मालूम है कि वोट मांगते समय जो चेहरा “ईमानदारी का रंग” चढ़ाकर लाया गया था, असल में वह सत्ता की जी-हुज़ूरी करने वाला एक सियासी तमाशा था।
रामपुर की जनता ने फैसला कर लिया है। अब न दलीलें चलेंगी, न बहाने। अब हिसाब होगा — जवाब सहित होगा।
