बिहार की भूमि भारत की दार्शनिक नींव का जन्मस्थल: उपराष्ट्रपति धनखड़

बुद्ध, महावीर, चंपारण और डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की विरासत का गौरवमयी संगम है बिहार

नई दिल्ली / मुज़फ्फरपुर: भारत के उपराष्ट्रपति (vice-president) जगदीप धनखड़ ( Jagdeep Dhankhar)ने मंगलवार को बिहार की ऐतिहासिक, बौद्धिक और संवैधानिक विरासत की सराहना करते हुए कहा कि “बिहार केवल एक राज्य नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है।” वे मुज़फ्फरपुर स्थित ललित नारायण मिश्रा कॉलेज ऑफ बिज़नेस मैनेजमेंट के स्थापना दिवस समारोह में बोल रहे थे।

उपराष्ट्रपति (vice-president) ने कहा, “यह वही भूमि है जहाँ बुद्ध को बोधि मिला, महावीर को आत्मज्ञान मिला, चंपारण से स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा मिली और डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जैसे संविधान निर्माता पैदा हुए।” उन्होंने नालंदा, विक्रमशिला और ओदंतपुरी जैसे प्राचीन विश्वविद्यालयों का उल्लेख करते हुए कहा कि “ऑक्सफोर्ड, हार्वर्ड और कैम्ब्रिज को मिला लें, तो भी नालंदा की बराबरी नहीं हो सकती।”

धनखड़ ने चंपारण सत्याग्रह को राष्ट्र निर्माण की नई व्याकरण की शुरुआत बताया और कहा कि “चंपारण केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि सत्य, गरिमा और सेवा आधारित प्रशासन की अवधारणा थी।” उन्होंने कहा कि “भारत की स्वतंत्रता की कथा बिहार की भूमि से शुरू होती है, और यह भूमि आज भी राष्ट्रीय चेतना का केंद्र है।”

उपराष्ट्रपति (vice-president)  ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सराहना करते हुए कहा कि यह “भारतीय ज्ञान परंपरा और जीवन-मूल्यों पर आधारित है, जो हमें आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में ले जाती है।”

आपातकाल पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने 25 जून को लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय बताते हुए कहा कि “उस समय संविधान की हत्या की गई थी। ऐसे समय में जयप्रकाश नारायण ने सम्पूर्ण क्रांति का आह्वान किया, जो भारत के लोकतंत्र का पुनर्जागरण था।”

उन्होंने संविधान निर्माता डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की भूमिका को विशेष रूप से याद किया और कहा कि “संविधान सभा में संवाद और विचार का स्तर उच्चतम था, जिसमें बिहार की आत्मा प्रतिबिंबित होती थी।”

कार्यक्रम में बिहार सरकार के उद्योग मंत्री श्री नीतीश मिश्र, अंबेडकर यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. दिनेश राय और कॉलेज निदेशक मनीष कुमार सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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