28 अगस्त से शुरू होगा जैन समाज का महापर्व दशलक्षण पर्व, दस दिनों तक गूंजेगी भक्ति और संयम की साधना

रामपुर। जैन समाज का पावन महापर्व दशलक्षण पर्व इस वर्ष 28 अगस्त से बड़े श्रद्धा, उत्साह और उल्लास के साथ आरंभ होगा। यह पर्व पूरे दस दिनों तक चलेगा, जिसमें जैन समाज के श्रद्धालु भक्ति, संयम और त्याग का पालन कर मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होने का संकल्प लेंगे।

जैन धर्म की मान्यता है कि 84 लाख योनियों में भटकने के बाद मनुष्य जीवन प्राप्त होता है और यही जीवन आत्मा को मोक्ष की ओर ले जाने का अवसर प्रदान करता है। इस महापर्व के दौरान श्रद्धालु सात्विक भोजन, उपवास और संयम का पालन करते हैं। कई श्रद्धालु निर्जल उपवास कर तप और साधना के मार्ग पर अपनी आत्मा को और दृढ़ बनाते हैं।

पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान
पर्व के दौरान प्रत्येक प्रातः श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर और श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में पूजा, प्रक्षाल एवं अभिषेक का आयोजन होगा। इसमें बड़ी संख्या में जैन समाजजन भाग लेंगे। वहीं सांध्य बेला में सामूहिक आरती, शास्त्र वाचन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा, जिसमें समाज के लोग भक्ति और उत्साह के साथ शामिल होंगे।

दशलक्षण पर्व के दस लक्षण
इस पर्व में जैन धर्म के दस लक्षणों का पालन अनिवार्य माना जाता है, जो आत्मशुद्धि और मोक्षमार्ग की साधना का आधार हैं—

उत्तम क्षमा : क्रोध त्यागकर हृदय में क्षमा का भाव धारण करना।

उत्तम मार्दव : अहंकार गलाकर विनम्रता अपनाना।

उत्तम आर्जव : कपट और छल से दूर रहते हुए सच्चाई अपनाना।

उत्तम शौच : आत्मा को क्रोध, मान, माया और लोभ से मुक्त कर शुद्ध बनाना।

उत्तम सत्य : सत्य का पालन करना और असत्य से दूर रहना।

उत्तम संयम : इंद्रियों और मन को वश में रखना।

उत्तम तप : आत्मा को तपकर स्वच्छ और निर्मल बनाना।

उत्तम त्याग : दान करना और अनावश्यक वस्तुओं का परित्याग करना।

उत्तम आकिंचन्य : परिग्रह का त्याग कर संचय से दूर रहना।

उत्तम ब्रह्मचर्य : जीवन में पवित्रता और ब्रह्मचर्य का पालन करना।

पूर्व तैयारी
पर्व की शुरुआत से पूर्व 24 अगस्त को दोनों मंदिरों में मंजन कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिमाओं और वेदियों का विशेष शुद्धिकरण किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में पुरुषों ने भाग लिया और मंदिर परिसर भक्ति एवं सेवा से गूंज उठा।

आयोजन समिति का संदेश
पर्व की संयोजिकाएं डॉ. शीनू जैन और वर्षा जैन ने बताया कि इस वर्ष भी दशलक्षण पर्व बड़े हर्षोल्लास और भक्ति भाव से मनाया जाएगा।

यह पर्व अहिंसा, संयम और आत्मशुद्धि का संदेश देता है। न केवल जैन समाज के लिए, बल्कि पूरे मानव समाज के लिए यह पर्व प्रेरणा का स्रोत है।

दस दिनों तक चलने वाले इस महापर्व के दौरान रामपुर शहर भक्ति, तप और संयम के वातावरण से सराबोर रहेगा।

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