गुस्ताखी माफ हरियाणा – पवन कुमार बंसल
राजा सब कुछ भांप रहे हैं।
भारत रत्न और पद्मश्री बांट रहे हैं।
नरवाने के मामले को टाल रहे हैं।
400 का सपना बांच रहे हैं।
फिर भी थर-थर कांप रहे हैं।
राजा को जीत का अनुमान है,
उनके ढोल में पोल है, ये भी ज्ञान है।
कीर्ति का गुब्बारा हवा से फूला है।
किसानों के लिए बिछा दिए कील-कांटे।
लोकतंत्र सूली पर झूला है।
मीडिया में कुछ मक्कार हैं,
जो राजा के एक इशारे पर
सच छिपाने को तैयार हैं।
फिर भी भारत माता के लाल
दिल्ली जाने को तैयार हैं।
ये कायर ही हैं, क्योंकि चीन जब से भारतीय सीमा में घुसा है, चीन का नाम तक नहीं लेते।
मणिपुर की समस्या से मुंह मोड़ रखा है।
जो आदमी समस्या सुलझाने की बजाय भागता हो, वो कायर ही होता है।
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