श्री बालाजी हनुमान मंदिर, सालासर की अद्भुत कथा

दाढ़ी-मूंछ वाले हनुमान जी और संत मोहनदास की अटूट भक्ति की कहानी

ऐलनाबाद, हरियाणा।डॉ. एम. पी. भार्गव (विशेष संवाददाता)राजस्थान के चूरू जिले में स्थित श्री बालाजी हनुमान मंदिर, सालासर आस्था, विश्वास और चमत्कारों का एक अनुपम केंद्र माना जाता है। लगभग 265 से 270 वर्ष पुराना यह मंदिर भक्त शिरोमणि संत मोहनदास जी और भगवान हनुमान के अद्भुत दाढ़ी-मूंछ वाले स्वरूप से जुड़ी रोचक कथा के लिए प्रसिद्ध है।

मूर्ति का प्रकट होना

विक्रम संवत 1811 (1755 ई.) में नागौर जिले के असोटा गांव में एक किसान खेत जोत रहा था। तभी उसका हल किसी कठोर वस्तु से टकराकर रुक गया। जब खुदाई की गई तो वहाँ से काले पत्थर की हनुमान जी की मूर्ति प्रकट हुई। यह समाचार पूरे क्षेत्र में फैल गया।

स्वप्न और स्थापना की कथा

मूर्ति मिलने के बाद असोटा गांव के ठाकुर को भगवान हनुमान ने स्वप्न में दर्शन देकर मूर्ति को सालासर ले जाने का निर्देश दिया। उसी रात सालासर के परम भक्त संत मोहनदास जी को भी बालाजी ने स्वप्न में बताया कि वे एक बैलगाड़ी में आ रहे हैं और जहाँ बैलगाड़ी स्वयं रुक जाए, वहीं मूर्ति स्थापित की जाए। बाद में ठीक उसी स्थान पर मूर्ति की स्थापना की गई, जहाँ आज सालासर बालाजी का भव्य मंदिर स्थित है।

दाढ़ी-मूंछ वाले हनुमान जी

सालासर बालाजी का मंदिर दुनिया का एकमात्र ऐसा मंदिर माना जाता है, जहाँ भगवान हनुमान दाढ़ी और मूंछ के साथ विराजमान हैं। मान्यता है कि यह स्वरूप संत मोहनदास जी की अटूट भक्ति का प्रतिफल है। बाल रूप (बालाजी) में होते हुए भी यह दाढ़ी-मूंछ वाला स्वरूप भक्तों के लिए विशेष आस्था का विषय है।

संत मोहनदास की भक्ति और अखंड धूणा

कहा जाता है कि मूर्ति की स्थापना के बाद संत मोहनदास जी ने 1759 ई. में मंदिर का निर्माण कराया। तभी से यहाँ अखंड धूणा (अखंड ज्योति) प्रज्वलित है, जो आज भी निरंतर जल रही है।

प्रमुख मान्यताएं और विशेषताएं

चमत्कारी प्रतिमा : सालासर बालाजी को मनोकामना पूर्ण करने वाला देवस्थान माना जाता है।

नारियल की मन्नत : यहाँ श्रद्धालु विशेष रूप से नारियल बांधकर मन्नत मांगते हैं।

अखंड ज्योति : मोहनदास जी द्वारा प्रज्वलित धूणी आज भी आस्था का केंद्र बनी हुई है।

विशेष स्वरूप : दाढ़ी-मूंछ वाला हनुमान स्वरूप भक्तों के लिए अद्वितीय दर्शन है।

आस्था का प्रमुख केंद्र

सालासर बालाजी का मंदिर हिंदू धर्म में आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहाँ वर्ष भर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था, बल्कि भक्ति, विश्वास और चमत्कारों का जीवंत प्रतीक माना जाता है।

 

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