जिस देश में गुरुओं को शिष्यों के अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरना पड़े तो, पूरी सभ्यता शर्मिंदा होती…
संवाददाता- मनोज कुमार यादवहमारा देश भारत, जिसे कभी "सोन की चिड़िया" और "विश्वगुरु" कहा जाता था, आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ शिक्षा, शिक्षक और शिष्य तीनों ही संघर्ष की अग्निपरीक्षा से गुजर रहे हैं। आज का यह विडंबनापूर्ण दृश्य है कि…
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