सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी: गोद लेने वाली मां को मैटरनिटी लीव, अब पैटरनिटी लीव पर भी मंथन

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने हमसानंदिनी नंदूरी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा है कि बच्चा गोद लेने वाली मां को भी मैटरनिटी लीव का पूरा अधिकार होगा। इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार को पिता के लिए पैटरनिटी लीव (पितृत्व अवकाश) का कानून बनाने पर विचार करने की सलाह दी है।

न्यायमूर्ति जस्टिस पारदीवाला और आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि बच्चों की परवरिश केवल मां की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि माता-पिता दोनों की साझा जिम्मेदारी है। ऐसे में कानून में भी इस संतुलन को मान्यता मिलनी चाहिए।

गोद लेने वाली मां को बड़ा अधिकार

अदालत ने स्पष्ट किया कि अब गोद लिए गए बच्चे की उम्र चाहे जो भी हो, मां को मैटरनिटी लीव मिलेगी। पहले 3 महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लेने पर ही 12 हफ्ते की छुट्टी का प्रावधान था, लेकिन कोर्ट ने इस सीमा को असंवैधानिक करार दिया।

पैटरनिटी लीव पर सरकार से कानून बनाने की अपील

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि पैटरनिटी लीव को एक सामाजिक सुरक्षा लाभ के रूप में देखा जाए और इस पर ठोस कानून बनाया जाए। अदालत का मानना है कि इससे बच्चे के शुरुआती विकास में पिता की भूमिका भी मजबूत होगी।

भारत में क्या है मौजूदा व्यवस्था?

फिलहाल भारत में महिलाओं को 26 हफ्ते की सवैतनिक मैटरनिटी लीव मिलती है (दो बच्चों तक), लेकिन पैटरनिटी लीव के लिए कोई सार्वभौमिक कानून नहीं है। कुछ सरकारी और निजी संस्थानों में सीमित अवकाश की व्यवस्था जरूर है, लेकिन यह अनिवार्य नहीं है।

इन देशों में मिलती है पैटरनिटी लीव

दुनिया के कई देशों में पितृत्व अवकाश का प्रावधान पहले से लागू है—

जापान: 1 साल तक की छुट्टी

आइसलैंड: 6 महीने (माता-पिता में साझा)

स्पेन: 16 हफ्ते

फिनलैंड: 160 दिन

स्वीडन: 480 दिन (साझा अवकाश)

इसके अलावा एस्टोनिया, स्लोवेनिया और पुर्तगाल जैसे देशों में भी पिताओं को सवैतनिक अवकाश मिलता है।

सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि भारत में भी जल्द ही पितृत्व अवकाश को लेकर ठोस नीति बन सकती है, जिससे कामकाजी परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।

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