Supermassive Black Hole: वैज्ञानिकों ने खोजा अजीब व्यवहार वाला सुपरमैसिव ब्लैक होल, तारा निगलने के बाद वर्षों से उगल रहा ‘जेट’

वैज्ञानिकों को एक ऐसे सुपरमैसिव ब्लैक होल का पता चला है, जिसका “खाने का तरीका” अब तक देखे गए ब्लैक होल से बिल्कुल अलग है। शोधकर्ताओं के अनुसार, इस ब्लैक होल ने अपने पास आए एक तारे को पहले फाड़कर निगल लिया और उसके बाद लगातार तेज़ी से चलने वाले पदार्थ का जेट अंतरिक्ष में छोड़ना शुरू कर दिया। हैरानी की बात यह है कि यह जेट पिछले छह वर्षों से लगातार निकल रहा है, जो सामान्य घटनाओं की तुलना में कहीं अधिक समय है।

पहले तारे को फाड़कर खाया

वैज्ञानिकों के मुताबिक, जिस तारे को इस ब्लैक होल ने निगला, वह एक लाल बौना तारा था। यह तारा हमारे सूर्य से लगभग 10 गुना छोटा था। जब यह तारा ब्लैक होल के बेहद करीब पहुंचा, तो उसके अत्यधिक गुरुत्वाकर्षण बल ने तारे को गैसों में तोड़ दिया और फिर उसे निगल लिया।

‘डकार’ जैसी प्रक्रिया से निकल रहा जेट

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, शोधकर्ताओं ने ब्लैक होल से निकल रहे इस जेट की तुलना “डकार” से की है। आमतौर पर तारे के टूटने के बाद बचा पदार्थ थोड़े समय में अंतरिक्ष में निकल जाता है, लेकिन इस मामले में यह प्रक्रिया असामान्य रूप से लंबी चली। जेट का छह साल तक सक्रिय रहना वैज्ञानिकों के लिए चौंकाने वाला है।

कैसे और किसने की खोज

5 फरवरी को प्रतिष्ठित एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन की मुख्य लेखिका ओरेगन यूनिवर्सिटी की एस्ट्रोफिजिसिस्ट यवेट सेंड्स हैं। उनका कहना है कि इस स्रोत की चमक में असाधारण वृद्धि देखी गई है। यह अब पहली बार खोजे जाने के समय से लगभग 50 गुना अधिक चमकदार हो चुका है। इस खोज के लिए अमेरिका के न्यू मैक्सिको और दक्षिण अफ्रीका में स्थित रेडियो टेलीस्कोप का इस्तेमाल किया गया।

कहां स्थित है यह ब्लैक होल

यह सुपरमैसिव ब्लैक होल हमारी मिल्की वे गैलेक्सी से बहुत दूर, एक दूसरी गैलेक्सी के केंद्र में स्थित है। यह पृथ्वी से लगभग 665 मिलियन प्रकाश वर्ष की दूरी पर है। एक प्रकाश वर्ष वह दूरी होती है, जो प्रकाश एक वर्ष में तय करता है।

कितना विशाल है यह ब्लैक होल

ब्लैक होल बेहद घने पिंड होते हैं, जिनका गुरुत्वाकर्षण इतना शक्तिशाली होता है कि रोशनी भी उससे बच नहीं पाती। यह सुपरमैसिव ब्लैक होल सूर्य से लगभग 50 लाख गुना अधिक विशाल है। इसका द्रव्यमान हमारी गैलेक्सी के केंद्र में मौजूद सुपरमैसिव ब्लैक होल के लगभग बराबर माना जा रहा है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज ब्लैक होल के व्यवहार और उनके आसपास होने वाली घटनाओं को समझने में नई दिशा दे सकती है।

 

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