केंद्र का पक्ष रखने के लिए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए..!

  • रिपोर्ट: मंजय वर्मा 

नई दिल्ली। वक्फ कानून को लेकर उठी संवैधानिक आपत्तियों के बीच आज सुप्रीम कोर्ट में एक अहम सुनवाई हुई, जिसमें केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पक्ष रखा। मुख्य न्यायाधीश भूषण रामाकृष्ण गवई और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ के समक्ष एसजी तुषार मेहता ने याचिकाकर्ताओं द्वारा संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के उल्लंघन को लेकर दर्ज की गई आपत्तियों का जवाब दिया।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, तुषार मेहता ने दलील दी कि वक्फ एक इस्लामिक अवधारणा ज़रूर है, लेकिन यह इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा,
“जब तक मैंने इस पर रिसर्च नहीं की थी, तब तक मुझे इस्लाम धर्म के इस हिस्से की जानकारी नहीं थी। लेकिन अब स्पष्ट है कि वक्फ इस्लाम का आवश्यक और अनिवार्य हिस्सा नहीं है।”

एसजी ने आगे कहा कि चैरिटी या दान का सिद्धांत सभी धर्मों में मौजूद है—चाहे वह ईसाई धर्म हो, हिंदू धर्म हो या सिख धर्म। लेकिन सुप्रीम कोर्ट का यह स्पष्ट मत है कि किसी भी धर्म में यह अनिवार्य धार्मिक अभ्यास नहीं माना गया है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा,
“हिंदुओं में दान की परंपरा है, सिख धर्म में भी यह परंपरा मजबूत है, लेकिन इसे धर्म का आवश्यक अंग नहीं कहा गया है। इसी तरह वक्फ भी एक सामाजिक-धार्मिक व्यवस्था हो सकती है, लेकिन इसे इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं ठहराया जा सकता।”

अब इस मुद्दे पर कोर्ट में आगे की सुनवाई के दौरान यह तय किया जाएगा कि क्या वक्फ कानून वाकई संविधान के अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) और 26 (धार्मिक संस्थाओं की स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता है या नहीं।

यह मामला आने वाले दिनों में संविधान की व्याख्या और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर एक महत्वपूर्ण निर्णय की दिशा में अग्रसर होता दिख रहा है।

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