समाजसेवियों ने दिखाई मिसाल: डिगडिगा–मुरलीपुर से देवा मार्ग की जर्जर सड़क कराई दुरुस्त, जनता ने जताया आभार

लखनऊ।राजधानी लखनऊ में जहां लोक निर्माण विभाग और नगर विकास विभाग सड़कों, नालियों व शहरी आधारभूत सुविधाओं के लिए हर वर्ष करोड़ों-अरबों रुपये का बजट जारी करते हैं, वहीं जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आती है। डिगडिगा–मुरलीपुर से देवा संपर्क मार्ग की बदहाल स्थिति ने एक बार फिर सरकारी तंत्र और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह सड़क लंबे समय से गहरे और जानलेवा गड्ढों से जूझ रही थी। हालात ऐसे थे कि दिन में भी इस मार्ग पर चलना मुश्किल हो जाता था, जबकि रात के समय गड्ढे दिखाई न देने के कारण आए दिन दुर्घटनाएं होती थीं। ई-रिक्शा और मोटरसाइकिलें पलटने से कई लोग घायल हुए, किसी का हाथ टूटा तो किसी का पैर। बावजूद इसके जिम्मेदार विभागों और जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई।

सरकारें बदलती रहीं, बजट आते रहे, लेकिन सड़क की हालत जस की तस बनी रही। अंततः जब प्रशासनिक उदासीनता हद से आगे बढ़ गई, तब क्षेत्र के समाजसेवियों ने स्वयं मोर्चा संभाला। समाजसेवी जितेंद्र नारायण और उनके सहयोगियों ने आगे बढ़कर डिगडिगा–मुरलीपुर से देवा संपर्क मार्ग को गड्ढामुक्त करने का बीड़ा उठाया और अपने प्रयासों से सड़क को दुरुस्त कराया।

समाजसेवियों की इस पहल से न सिर्फ राहगीरों को राहत मिली, बल्कि क्षेत्र में यह संदेश भी गया कि जब व्यवस्था विफल हो जाए, तब सामाजिक जिम्मेदारी कैसे निभाई जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जनप्रतिनिधि और विभाग ध्यान देते, तो इतने हादसे न होते।

इस सराहनीय कार्य के लिए क्षेत्रीय जनता ने समाजसेवी जितेंद्र नारायण के साथ-साथ दिनेश कुमार यादव, डॉ. लालता प्रसाद, धीरेंद्र कुमार यादव, सुशील कुमार यादव, अरविंद कुमार यादव, मनोज कुमार, संजय वर्मा, हंसराज वर्मा, शिव कुमार वर्मा, जय कारण पाल, अभिषेक यादव, अनुराग यादव, भारत सिंह, गजराज वर्मा, सुशील कुमार वर्मा और उपेंद्र वर्मा का आभार व्यक्त किया।

स्थानीय नागरिकों ने उम्मीद जताई कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस पहल से सीख लेकर भविष्य में ऐसी समस्याओं का समय रहते समाधान करेंगे, ताकि आम जनता को अपनी जान जोखिम में डालकर सड़कों पर चलने को मजबूर न होना पड़े।

 

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