15 जनवरी को सीएम भगवंत मान को स्पष्टीकरण के लिए बुलाने पर सिख संगठनों में मंथन, मनजीत सिंह भोमा ने जत्थेदार अकाल तख्त से पुनर्विचार की अपील

दिल्ली।श्री अकाल तख्त साहब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज की ओर से पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को 15 जनवरी को स्पष्टीकरण देने के लिए बुलाए जाने के निर्णय को लेकर सिख समुदाय में चर्चा तेज हो गई है। इस विषय पर दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) के अध्यक्ष मनजीत सिंह भोमा ने मीडिया से खास बातचीत की और कई अहम बिंदुओं पर अपनी राय रखी।

मनजीत सिंह भोमा ने स्पष्ट कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान कोई पतित सिख नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जत्थेदार अकाल तख्त की ओर से भगवंत मान को भेजे गए पत्र में सुधार की आवश्यकता है और अकाल तख्त को गलती सुधार कर नई चिट्ठी जारी करनी चाहिए। भोमा ने मांग की कि 15 जनवरी से पहले जत्थेदार अकाल तख्त सिख विद्वानों की बैठक बुलाकर इस पूरे मामले में उनकी राय अवश्य लें।

उन्होंने आशंका जताई कि यदि बिना व्यापक विचार-विमर्श के मुख्यमंत्री भगवंत मान को अकाल तख्त पर बुलाया गया तो सिख कौम दो हिस्सों में बंट सकती है। इसलिए पंथक संगठनों और सिख विद्वानों से सलाह लेना बेहद जरूरी है। भोमा ने कहा कि यह पहली बार है जब किसी ऐसे सिख को, जो पतित नहीं है, अकाल तख्त पर पेश होने के लिए कहा गया है।

भोमा ने यह भी कहा कि 15 जनवरी को भारत की राष्ट्रपति अमृतसर स्थित गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी आ रही हैं, इसके बावजूद भगवंत मान ने यह बयान दिया है कि वे उस दिन अकाल तख्त तक सात बार नंगे पांव आएंगे। उन्होंने दोहराया कि इस मामले में आगे बढ़ने से पहले सिख विद्वानों से गंभीर चर्चा की जानी चाहिए और जत्थेदार अकाल तख्त को स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से निर्णय लेना चाहिए।

328 स्वरूपों के मामले को लेकर भोमा ने कहा कि यह केवल पंजाब या देश का नहीं, बल्कि पूरी दुनिया से जुड़ा अत्यंत गंभीर मामला है। उन्होंने एसजीपीसी प्रधान हरजिंदर सिंह धामी के उस बयान पर भी सवाल उठाए, जिसमें कहा गया है कि एसजीपीसी पुलिस के साथ सहयोग नहीं करेगी और केवल अकाल तख्त के आदेशों का पालन करेगी। भोमा ने कहा कि इससे ऐसा प्रतीत होता है मानो धामी स्वयं को दोषी मान रहे हों। उन्होंने यह भी कहा कि एसजीपीसी प्रधान की नियुक्ति और उनका राजनीतिक जुड़ाव जगजाहिर है, इसलिए इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

इसके अलावा, भोमा ने पाकिस्तान में इस्लाम धर्म कबूल करने वाली सरबजीत कौर के मामले पर भी कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि किसी महिला का पाकिस्तान जाकर धर्म परिवर्तन करना बेहद निंदनीय है। यदि वह दोबारा भारत आती है तो उसे अपने धर्म और मर्यादा का ध्यान रखते हुए सिख धर्म की परंपराओं का पालन करना चाहिए।

भोमा ने अंत में कहा कि श्री अकाल तख्त साहब सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था है और उससे जुड़े हर फैसले में पंथक एकता, मर्यादा और निष्पक्षता सर्वोपरि होनी चाहिए।

 

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