नई दिल्ली। शक्ति की उपासना का महान पर्व शारदीय नवरात्रि 2025 आज सोमवार, 22 सितंबर से शुरू हो गया है। नवरात्रि को पूरे देशभर में भक्त बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाते हैं। इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित होता है। भक्त इस दिन कलश स्थापना (घटस्थापना) करते हैं और मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना करते हैं।
नवरात्रि के पहले दिन कौन सा रंग पहनें?
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा के लिए सफेद रंग को शुभ माना गया है। सफेद रंग शांति, पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। इस दिन सफेद कपड़े पहनकर पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।
मां शैलपुत्री का मंत्र
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना करते समय भक्त इन मंत्रों का जाप करते हैं—
“ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः”
“वंदे वांछितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥”
“या देवी सर्वभूतेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”
मां शैलपुत्री को क्या भोग लगाएं?
मां शैलपुत्री को गाय के दूध और घी से बनी वस्तुएं अर्पित करना विशेष फलदायी माना गया है। पहले दिन खीर, रबड़ी, मावा के लड्डू, सफेद बर्फी और कद्दू का हलवा चढ़ाने से घर में सुख-शांति आती है और कष्ट दूर होते हैं।
मां शैलपुत्री का मंत्र
वन्दे वांछितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखरम्,
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्।
पूणेन्दु निभां गौरी मूलाधार स्थितां प्रथम दुर्गा त्रिनेत्राम्।
पटाम्बर परिधानां रत्नाकिरीटा नामालंकार भूषिता।
प्रफुल्ल वंदना पल्लवाधरां कातंकपोलां तुंग कुचाम्,
कमनीयां लावण्यां स्नेमुखी क्षीणमध्यां नितम्बनीम्।
या देवी सर्वभूतेषु शैलपुत्री रूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नम:,
ओम् शं शैलपुत्री देव्यै: नम:।
मां शैलपुत्री की आरती
शैलपुत्री मां बैल असवार। करें देवता जय जयकार।
शिव शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने न जानी।
पार्वती तू उमा कहलावे। जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।
ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू। दया करे धनवान करे तू।
सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती जिसने उतारी।
उसकी सगरी आस पुजा दो। सगरे दुख तकलीफ मिला दो।
घी का सुंदर दीप जला के। गोला गरी का भोग लगा के।
जय गिरिराज किशोरी अंबे। शिव मुख चंद चकोरी अंबे।
मनोकामना पूर्ण कर दो। भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।
नवरात्रि का यह पावन अवसर शक्ति की उपासना और आत्मिक शुद्धि का प्रतीक है। मां शैलपुत्री की कृपा से भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति बनी रहती है।
