मिर्जापुर मंडलीय अस्पताल में लूट खसोट का सनसनीखेज मामला: मानवता शर्मसार, डॉक्टर पर 20 हजार की उगाही का आरोप

  •  रिपोर्ट- मंजय वर्मा

मिर्जापुर के मंडलीय अस्पताल, जो मां विंध्यवासिनी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध है, एक बार फिर विवादों के घेरे में है। इस बार हड्डी रोग विभाग के डॉक्टर राजेश कुमार पर गंभीर आरोप लगे हैं। एक पीड़ित तीमारदार ने दावा किया है कि डॉक्टर ने हड्डी के ऑपरेशन के लिए 20 हजार रुपये की मांग की और पैसे न देने पर दुर्व्यवहार किया। यह मामला अब सोशल मीडिया पर ऑडियो, वीडियो और शिकायती पत्र के साथ वायरल हो रहा है, जिसने अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामले की पूरी कहानी 
मामला मिर्जापुर मंडलीय अस्पताल के हड्डी रोग विभाग से जुड़ा है, जहां एक मरीज के परिजनों ने डॉक्टर राजेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित का कहना है कि उनके मरीज को ऑपरेशन की जरूरत थी, लेकिन डॉक्टर ने इलाज शुरू करने से पहले 20 हजार रुपये की मांग की। इतना ही नहीं, डॉक्टर ने कथित तौर पर साईं मेडिकल के मालिक को बुलाकर यह राशि जमा करने का दबाव बनाया। जब परिजनों ने पैसे देने में असमर्थता जताई, तो उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। पीड़ित ने इस पूरी घटना का ऑडियो और वीडियो रिकॉर्ड कर लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

पीड़ित ने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य के नाम एक शिकायती पत्र भी लिखा है, जिसमें डॉक्टर राजेश कुमार की इस हरकत को मानवता के खिलाफ बताया गया है। शिकायती पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि पिछले दो दिनों से इस मामले को दबाने के लिए समझौते की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन पीड़ित ने इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का फैसला किया।

सोशल मीडिया पर वायरल, जनता में आक्रोश
शिकायती पत्र, ऑडियो और वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जनता में गुस्सा भड़क रहा है। लोग इस घटना को स्वास्थ्य सेवाओं में भ्रष्टाचार का जीता-जागता उदाहरण बता रहे हैं। कई यूजर्स ने टिप्पणी की है कि मंडलीय अस्पताल में पहले भी भ्रष्टाचार और लापरवाही के मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। एक यूजर ने लिखा, “यह शर्मनाक है कि गरीब मरीजों के साथ ऐसी सौदेबाजी हो रही है। क्या यही है योगी सरकार का जीरो टॉलरेंस?”

मंडलीय अस्पताल का विवादों से पुराना नाता
मिर्जापुर का मंडलीय अस्पताल पहले भी कई बार विवादों में रहा है। हाल के वर्षों में, अस्पताल में दवाइयों की कमी, मरीजों के साथ दुर्व्यवहार, और भ्रष्टाचार के आरोपों की खबरें सामने आ चुकी हैं। उदाहरण के तौर पर, एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अस्पताल में दवाइयों की कमी के चलते मरीजों को बाहर से महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। इसके अलावा, हाल ही में एक बाबू पर नौकरी दिलाने के नाम पर 8 लाख रुपये की ठगी का आरोप भी लगा था।

हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने कुछ सुधारों की बात भी कही है। उदाहरण के लिए, हाल ही में सी-आर्म मशीन की उपलब्धता से हड्डी के ऑपरेशनों में सुधार की खबर आई थी। फिर भी, इस तरह के भ्रष्टाचार के आरोप अस्पताल की छवि को धूमिल कर रहे हैं।

 प्रशासन की चुप्पी, क्या होगी कार्रवाई? 
इस मामले में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और अस्पताल प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। पीड़ित का आरोप है कि मामले को दबाने के लिए पिछले दो दिनों से समझौते की कोशिशें चल रही हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ऑडियो और वीडियो में कथित तौर पर डॉक्टर और साईं मेडिकल के मालिक की बातचीत का जिक्र है, जो इस मामले की गंभीरता को और बढ़ाता है।

 जरूरत है पारदर्शिता और सख्त कार्रवाई 
यह घटना न केवल मिर्जापुर मंडलीय अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत को भी उजागर करती है। गरीब और असहाय मरीजों के साथ इस तरह की सौदेबाजी न केवल मानवता को शर्मसार करती है, बल्कि सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति पर भी सवाल उठाती है।

जनता अब इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है। यह देखना बाकी है कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन और स्थानीय अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। क्या डॉक्टर राजेश कुमार के खिलाफ कोई कार्रवाई होगी, या यह मामला भी पहले की तरह दब जाएगा?

इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की अभी बहुत जरूरत है। मरीजों के हितों की रक्षा और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि मिर्जापुर जैसे अस्पताल वास्तव में गरीबों के लिए सहारा बन सकें, न कि लूट का अड्डा

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