ऐलनाबाद,मार्च (एम.पी. भार्गव)। हरियाणा सरकार प्रदेश में जल संरक्षण को बढ़ावा देने और गिरते भूजल स्तर को सुधारने के उद्देश्य से कृषि विभाग के माध्यम से महत्वाकांक्षी ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना चला रही है। इस योजना के तहत किसानों को धान की पारंपरिक फसल के स्थान पर कम पानी वाली वैकल्पिक फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
सरकार का लक्ष्य है कि धान जैसी अधिक पानी खपत करने वाली फसलों की जगह ऐसी फसलें बोई जाएं, जिनमें पानी की कम आवश्यकता हो और किसानों को भी बेहतर आय प्राप्त हो सके। योजना के तहत जो किसान धान की खेती छोड़कर अन्य वैकल्पिक फसलों की बुवाई करेंगे, उन्हें सरकार की ओर से प्रति एकड़ 8000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
कृषि विभाग के अनुसार किसान धान के स्थान पर कपास, बाजरा, मक्का, ज्वार, बागवानी फसलें, सब्जियां, खरीफ की दालें और तिलहन जैसी कम पानी वाली फसलें उगा सकते हैं। इसके अलावा यदि कोई किसान खेत को खाली छोड़ता है, तो भी उसे योजना का लाभ मिल सकता है। इससे पानी की खपत कम होगी और खेती अधिक टिकाऊ बन सकेगी।
योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण कराना अनिवार्य है। पंजीकरण के दौरान किसानों को अपनी भूमि और बोई जाने वाली फसल से संबंधित पूरी जानकारी देनी होती है। इसके आधार पर कृषि विभाग पात्र किसानों को प्रोत्साहन राशि प्रदान करता है।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों से अपील की है कि वे जल संरक्षण के महत्व को समझें और धान की खेती के स्थान पर वैकल्पिक फसलों को अपनाकर इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। इससे जहां एक ओर प्रदेश में जल संकट को कम करने में मदद मिलेगी, वहीं किसानों की आय में भी बढ़ोतरी संभव हो सकेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अधिक से अधिक किसान इस योजना से जुड़ते हैं तो हरियाणा में भूजल स्तर को बचाने और भविष्य की खेती को सुरक्षित बनाने की दिशा में यह पहल बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी।
