पुरी, 27 जून: पुरी के प्रसिद्ध श्रीजगन्नाथ मंदिर से भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की भव्य रथ यात्रा के तहत शुक्रवार को ‘पहंडी’ अनुष्ठान का शुभारंभ हुआ। इस पवित्र परंपरा के अंतर्गत, तीनों भाई-बहनों को शाही समारोह में उनके रथों तक पहुंचाया जाता है।
हालांकि ‘पहंडी’ अनुष्ठान सुबह 9:30 बजे शुरू होना था, लेकिन यह एक घंटे की देरी से आरंभ हुआ और तीन घंटे तक चला। इस दौरान मंदिर की 22 सीढ़ियों ‘बैसी पहाचा’ से देवताओं को पारंपरिक संगीत और जयघोष के बीच रथों तक ले जाया गया।
अनुष्ठान की शुरुआत भगवान विष्णु के चक्र ‘सुदर्शन’ को मंदिर से बाहर लाकर देवी सुभद्रा के रथ ‘दर्पदलन’ पर विराजमान करने से हुई। इसके बाद भगवान बलभद्र को उनके रथ ‘तालध्वज’ तक लाया गया। देवी सुभद्रा को ‘सुन्या पहंडी’ नामक विशेष परंपरा के तहत उनके रथ तक लाया गया, जिसमें उन्हें आकाश की ओर मुख किए हुए ले जाया जाता है।
अंत में जब ‘कालिया ठाकुर’ भगवान जगन्नाथ मंदिर से बाहर आए, तो पूरी ग्रैंड रोड श्रद्धालुओं की भावनाओं से गूंज उठी। चारों ओर ‘जय जगन्नाथ’ के जयकारे, ओड़िसी नर्तकों की प्रस्तुति, लोक कलाकारों की धुनें और धार्मिक उल्लास वातावरण में अद्वितीय ऊर्जा भर रहे थे।
एक ओड़िसी नर्तकी मैत्रेयी माहेश्वरी ने भावुक होकर कहा, “अगर भगवान मुझे एक नजर देख लें, तो मेरा जीवन धन्य हो जाएगा।”
रथ यात्रा आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के दिन हर वर्ष आयोजित की जाती है। यह वर्ष का एकमात्र अवसर होता है, जब भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहन मंदिर से बाहर निकलते हैं और भक्तों को दर्शन देते हैं। रथों को गुंडीचा मंदिर तक खींचा जाता है, जो मंदिर से लगभग 2.6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
‘पहंडी’ से पूर्व ‘मंगल आरती’ और ‘मैलम’ सहित कई पारंपरिक पूजा विधियां संपन्न की गईं। अब तीनों भव्य रथ सिंह द्वार के सामने पूर्व की ओर गुंडीचा मंदिर की दिशा में खड़े हैं। दोपहर 3:30 बजे गजपति महाराज दिव्यसिंह देब द्वारा ‘छेरेपाहरा’ (रथों की झाड़ू लगाना) की रस्म पूरी की जाएगी, जिसके बाद शाम 4 बजे से रथ खींचने की परंपरा शुरू होगी।
इस ऐतिहासिक पर्व के साक्षी बनने के लिए लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचे हैं। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। ओडिशा पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र बलों, एनएसजी समेत लगभग 10,000 जवान तैनात हैं। पुलिस महानिदेशक वाई बी खुरानिया ने बताया कि “त्योहार को शांतिपूर्ण और सुरक्षित बनाने के लिए हर संभव व्यवस्था की गई है। 275 एआई-सक्षम सीसीटीवी कैमरे निगरानी कर रहे हैं।”
पुरी का रथ यात्रा महोत्सव एक बार फिर आस्था, परंपरा और भक्ति का अद्वितीय संगम बन गया है।
